ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
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सब की बोलती बंद है इन दिनों,वक़्त बोल रहा है ..बड़ी ही ख़ामोशी सेकोई बहस नहीं,ना ही कोई,सुनवाई होती हैएक इशारा होता हैऔर पूरी क़ायनात उस परअमल करती है!!!…सब तैयार हैं कमर कसकर,बादल, बिजली, बरखाके साथ कुछ ऐसे वायरस भीजिनका इलाज़,सिर्फ़ सतर्कता हैजाने किस घड़ीकरादे, वक़्त ये...
Yashoda Agrawal
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पानी सी होती हैं स्त्रियाँहर खाली स्थान बड़ी सरलता सेअपने वजूद से भर देती हैंबगैर किसी आडंबर केबगैर किसी अतिरंजना के..आश्चर्य येकि जिस रंग का अभाव हो उसी रंग में रंग जाती हैं ..जाड़े में धूप ..उमस में चांदनी ..आँसुओं में बादल..उदासी में धनक..छोटी बहन को एक भाई क...
Yashoda Agrawal
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2122 1122 1122 22दिल सलामत भी नहीं और ये टूटा भी नहीं ।दर्द बढ़ता ही गया जख़्म कहीं था भी नहीं ।।कास वो साथ किसी का तो निभाया होता ।क्या भरोसा करें जो शख्स किसी का भी नहीं ।।क़त्ल का कैसा है अंदाज़ ये क़ातिल जाने ।कोई दहशत भी नहीं है कोई चर्चा भी नहीं ।।मैकदे में हैं ते...
Yashoda Agrawal
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वज़्न   2122.   2122.   212मतलारस्मे उल्फत है गवारा क्यों नहींदर्द है दिल का सहारा क्यों नहीं ।।लाड़ से उसने निहारा क्यों नहींऔर नज़रों का इशारा क्यों नहीं ।।इश्क मे ऐसा अजब दस्तूर हैवो किसी का है हमारा क्यों नहीं ।।प्यार से उसने लगाया जब...
Yashoda Agrawal
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तनिक ठहरोरुको तोदेखो साड़ी में पायल उलझ गईकि दायित्व में अलंकार उलझ गएसंस्कारों में व्यथा उलझ गई..कल भी ऐसा ही हुआ थाकल भी पुकारा था तुम्हेंकल भी तुम न रुके..सुनो ये वही पायल हैंजो मैंने भांवरों में पहनी थीये साक्षी हैं तुम्हारे उस वचन कीकि तुम मुझे अनुगामिनी नहींसख...
Yashoda Agrawal
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दहेज में मिला है मुझेएक बड़ा संदूक हिदायतों काआसमानी साड़ी में लिपटा हुआ संतोषसतरंगी ओढ़नी में बंधी सहनशीलतागांठ में बांध दिया था मां नेआशीष,"अपने घर बसना और....विदा होना वहीं से "फिर चलते चलते रोक कर कहा था"सुनो,किसी महत्वाकांक्षा को मत पालनाजो मिले स्वीकारनाजो ना...
Yashoda Agrawal
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वो होतीं है नाकुछ लड़कियां,जिन्हें पंक्ति के अंत मे दिखते हैप्रश्नचिन्ह ना की पूर्णविरामवोजिन्हें संस्कारी और मूक बधिरहोने में अंतर मालूमहोता हैवो जोधार्मिक नहीं आध्यात्मिकहोने में विश्वास रखतीं हैंजिन्हें भीड़ नहींचन्द अपनो कीतलाश होती हैजो किसी भी कार्य केअंत का सो...
Yashoda Agrawal
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चहुँ ओरचहकती चहल - पहल मेंजाने कहाँ खो गई हूँ , मैं !!और , तुम कहते होइस चहल - पहल का एक अहम हिस्सा हूँ , मैं .....एक हलचलएक बेचैनीएक तलाशएक तिश्नगीकुछ भ्रान्त हूँ .. मैं क्लांत हूँकि, कौन कहानी का किस्सा हूँ ,मैं ?कितने मुखौटे पहने मैंनेकब - कब दर्पण देखे मैंने .....
 पोस्ट लेवल : फेसबुक से वीणा जैन
Yashoda Agrawal
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जवाँ शोहरत , जवाँ किस्सेजवानी संगमरमरी ना रख,राश*करें तूफानों से वर्जिशदिवानों सा हुनर तू रखआतश से जुनूं लेकर हवा को कैद करके चलकभी कश्ती जो समंदर में राश* पतवार बनकर चलरिश्ते नियामात हैं खुदाराझुककर हीं राश* हैं निभतेबटोरा एक ही दौलत,जहाँ तुम संग हो रहते...
Yashoda Agrawal
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ग़ैरों को अपना बनाने का हुनर है तुममेंकभी अपनो को अपना बना कर देखो ना..ग़ैरों का मन जो घड़ी में परख लेते होकभी अपनो का मन टटोल कर देखो ना..माना कि ग़ैरों संग हँसना मुस्कुराना आसां हैकभी मुश्किल काम भी करके देखो ना..कामकाजी बातचीत ज़रूरी है ज़माने सेकभी अपनो संग ग़ै...