ब्लॉगसेतु

Yashoda Agrawal
3
ग़ैरों को अपना बनाने का हुनर है तुममेंकभी अपनो को अपना बना कर देखो ना..ग़ैरों का मन जो घड़ी में परख लेते होकभी अपनो का मन टटोल कर देखो ना..माना कि ग़ैरों संग हँसना मुस्कुराना आसां हैकभी मुश्किल काम भी करके देखो ना..कामकाजी बातचीत ज़रूरी है ज़माने सेकभी अपनो संग ग़ै...
Yashoda Agrawal
3
लुटे न देश कहीं आज लंतरानी में ।लगा रहे हैं मियां आग आप पानी में।।खबर है सबको किधर जा रही है ये कश्ती ।जनाब जीते रहें आप शादमानी में ।।अजीब शोर है खामोशियों के बीच यहाँ ।बहें हैं ख़्वाब भी दरिया के इस रवानी में ।।सवाल जब से तरक़्क़ी पे उठ रहा यारो ।।चुरा रहे हैं नज़र ल...
Yashoda Agrawal
3
भीड़ देख अझुरायल हउवा?भाँग छान बहुरायल हउवा?बुधिया जरल बीज से घायलकइसे कही कि सावन आयल!पुरूब नीला, पच्छुम पीयरनीम अशोक पीपल भी पीयरकेहू ना जरको हरियायलकइसे कही कि सावन आयल!कउने डांड़े में बदरा-बदरीखेलत हउवन पकरा-पकरीधुपिया से अंखिया चुंधियायलकइसे कही कि सावन आयल!कत...
Yashoda Agrawal
3
2122 1212 22पूछिये मत कि हादसा क्या है ।पूछिये दिल कोई बचा क्या है।।दरमियाँ इश्क़ मसअला क्या है।तेरी उल्फ़त का फ़लसफ़ा क्या है ।।सारी बस्ती तबाह है तुझसे ।हुस्न तेरी बता रज़ा क्या है ।।आसरा तोड़ शान से लेकिन ।तू बता दे कि फायदा क्या है ।।रिन्द के होश उड़ गए कैसे ।रुख से च...
Yashoda Agrawal
3
नहीं ज़िंदगीयूँ नग्न न चली आया करो कुरूप लगती हो बेहतर है कि कुछ लिबास पहन लोकि जब शिशुओं के पास जाओतो तंदुरुस्ती का लिबास ओढ़ो..जब बेटियों के पास जाओतो यूँ तो ओढ़ सकती हो गुलाबी पुष्पगुच्छ से सजी चुनरीया इंद्रधनुषी रंगों से सिली क़ुर्तीपरंतु सुनो तु...
Yashoda Agrawal
233
बारिश खुली नही है अभीअभी तो बंधे पड़े हैं बादलहवाओं का बहकना बाकी है अभीअभी सूखा पड़ा है मन..कुछ ही बूंदे गिरी हैं अभीकि अभी तो सूरज धुला भी नहींकोई सांझ नहाई भी नहीं पोखर भरे भी नहीं बच्चे भीगे भी नहीं रात गुनगुनाई भी नहीं झींगुर बोले भी नहीं ..ह...
Yashoda Agrawal
3
2122 2122 212हुस्न का बेहतर नज़ारा चाहिए ।कुछ तो जीने का सहारा चाहिए ।।हो मुहब्बत का यहां पर श्री गणेश ।आप का बस इक इशारा चाहिए ।।हैं टिके रिश्ते सभी दौलत पे जब ।आपको भी क्या गुजारा चाहिए ।।है किसी तूफ़ान की आहट यहां ।कश्तियों को अब किनारा चाहिए ।।चाँद कायम रह सके जल...
Yashoda Agrawal
3
मेरी ही करुणा परटिकी है ये सृष्टि ..मेरे ही स्नेह से उन्मुक्त होते हैं नक्षत्र..मेरे ही प्रेम सेआनंद प्रस्फुटित होता है ..मेरे ही सौंदर्य पर डोलता है लालित्य ..और मेरे ही विनय पर टिका है दंभ..कि प्रेम स्नेह और करुणा का अक्षय पात्र हूँ मैं जितना...
Yashoda Agrawal
3
बचपन से ही मुझे पढ़ाये गए थे संस्कारयाद कराई गईं मर्यादाएँहदों की पहचान कराई गई सिखाया गया बहनाधीरे धीरे अपने किनारों के बीचतटों को बचाते हुए..मन की लहरों को संयमित रख कर दायित्व ओढ़ कर बहना था आवेग की अनुमति न थी मुझेअधीर न होना था हर हाल श...
Yashoda Agrawal
3
स्त्री सुख की खोज मेंऔर प्रेम की चाह मेंमरीचिका की मृगी की तरह भागती रहती है पिता के घर से पति के घरपति के घर से बेटे के घर ..पुनः पुनः लौटने को ..हर जगह से बटोरती हैं क़िस्से जिन्हें याद कर अतीत में झाँकती रहती है..न जाने क्यों हर वर्तमान अतीत से ज़...