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Kheteswar Boravat
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जन्मेजय तिवारी
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                   ‘चित्रगुप्त जी, आजकल आपके रहन-सहन कुछ ठीक दिखाई नहीं देते...जब देखो आँखें बन्द ।’ महाराज यमराज अपने सिंहासन पर पहलू बदलते हुए बोले । चेहरा तनिक क्रोध से लालिमा के छींटों से युक्त होने लगा था...
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