ब्लॉगसेतु

शेखर सुमन
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मैं घिसता हूँ खुद को हर रोज,खुद को खुद से आगे निकालना चाहता हूँ,ये रगड़ एक आग पैदा करती हैमैं अकेला बैठ कर जल जाता हूँ हर शाम उसमें...थक कर, घायल होकरसवाल फिर खुद से ही करता हूँकि क्या ज़रुरत है इस संघर्ष कीदिल भी कन्धा उचका कर दे देता है जवाब,"शायद बस एक बेहतर कल की...
शेखर सुमन
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मुझे कटिहार का वो बचपन याद आता है, मासूम से थे वो दिन, मैं दुनिया समझने की कोशिश कर रहा था, मैं उन दिनों कहानियां पढता था... फंतासी वाली कहानियां.. परियों की कहानियां, जादू की कहानियां, सुपर हीरोज की कहानियां... उन कहानियों को पढ़ते-पढ़ते शायद मैं इतना ज्यादा खो गया...
शेखर सुमन
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परिवर्तन, ये शब्द और इसका निर्माणउतना ही सहज &#23...
सुनील  सजल
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 एक बकवास व्यंग्य – सलाहहमारे पड़ोस के मस्तराम जी हमेशा दारू के नशे में मस्त रहते हैं | मगर मजाल है कि वे बहक जाएं | कभी किसी को अनाप -शनाप नहीं बोलते | छोटे –बड़े सभी उनके लिए आदर के पात्र हैं | वैसे वे एक अच्छे सलाहकार के रूप में पहचाने जाते हैं |मगर...
सुनील  सजल
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 तीन बकवास ****************@रमियागाँव की रमिया घर-घर नाच गा रही है ,किसी तरह उसकी रोजी रोटी चल रही हैपर लोगो की नज़रों में उसकी कला की क़द्र नहीं है ,बल्कि उसकी गदराई जवानी खल रही है |!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!!@रह...
 पोस्ट लेवल : तीन बकवास
शेखर सुमन
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लिखना न लिखना अक्सर मूड स्विंग पर निर्भर करता है, और थोड़ा बहुत वक़्त की उपलब्धता पर भी... लेकिन पिछले कुछ दिनों से ज़िंदगी के कई पहलू से गुजरते हुये आज वाकई निराश हूँ, इसलिए नहीं कि ज़िंदगी में कुछ अच्छा नहीं हो रहा, हम ऐसा कह भी नहीं सकते क्यूंकी शायद जब अच्छा हो रहा...
 पोस्ट लेवल : बकवास
शेखर सुमन
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कागज़ के उस मुड़े-तुड़े पन्ने पर याद तुम्हारी रुकी हुयी है.... न तुमसे मोहब्बत है,न ही कोई गिला रहा अब,फिर भी न जाने क्यूँनमी तुम्हारे नाम की अब भी मेरी आखों में रुकी हुयी है.... कुछ दरका, कुछ टूटा जैसे  दिल का जैसे सुकून गया था,माज़ी की उस मैली चादर पेखुशबू उस शा...
 पोस्ट लेवल : रद्दी बकवास यादें
शेखर सुमन
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आज करवाचौथ पर फेसबुक पर तरह-तरह के स्टेटस देखे, कुछ बेहद कड़वे कुछ प्यार में पूरी तरह से डूबे हुये, किसी भी इस तरह के स्टेटस पर अपनी राय देने से बचा... जब भी इस तरह का कोई भी पर्व आता है अजीब तरह की कशमकश होती है... इस बाजारवाद को अगर एक किनारे कर भी दें लेकिन एक...
praveen blogger
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...मैं कौन हूँजो हो जाता हूँ बहरानीरा राडिया के टेप सुनजिसमें मेरे ही साथीकर रहे हैं फिक्सनीतियाँ, लाइसेंसयहाँ तक कि मंत्रालय तकमैं कौन हूँजिसको दिखते ही नहींअंधे हो जाने के कारणकोयला घोटाले मेंनाम काला न करने कीऐवज में सौ करोड़की रंगदारी माँगते हुऐअपने दो दो झंडाब...
शेखर सुमन
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पिछले एक घंटे से न जाने कितनी पोस्ट लिखने की कोशिश करते हुए कई ड्राफ्ट बना चुका हूँ... सारे खयालात स्कैलर बनकर एक दुसरे से भिडंत कर रहे हैं... कई शब्द मुझे छोड़कर हमेशा के लिए कहीं दूर जा चुके हैं, मेरे पास चंद उल-झूलुल लफंगे अक्षरों के सिवा कुछ भी नहीं बचा है ... क...