ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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एक कार्यक्रम में एक विशेषज्ञ युवाओं और किशोरों से सम्बंधित समस्या पर प्रकाश डाल रहे थे. बातचीत के दौरान उन्होंने आत्महत्या के दो बिंदु बताये. उनके द्वारा बताई चंद बातों का सार ये निकलता है कि एक स्थिति  में आत्महत्या करने वाला व्यक्ति इसकी पूरी तैयारी कर चुका...
kumarendra singh sengar
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आजकल मोबाइल का इस्तेमाल आवश्यकता से अधिक अनिवार्यता जैसा लगने लगा है. प्रत्येक व्यक्ति एक-एक मोबाइल से ज्यादा मोबाइल एकसाथ उपयोग में लाते दिखाई दे रहा है. स्थिति ये आ गई है कि लोगों से घिरे होने के बाद भी व्यक्ति मोबाइल में व्यस्त रहता है. सुबह उठने के बाद सबसे पहल...
Kavita Rawat
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kumarendra singh sengar
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ज्यों-ज्यों हम इंसानों ने विकास की राह पकड़ी, त्यों-त्यों रिश्तों की डोर को पीछे छोड़ने का उपक्रम बनाये रखा. हम आगे तो बढ़ते गये पर अपनी इंसानियत को बहुत पीछे छोड़ आये. हमने अपने अलावा किसी और पर विश्वास करना बन्द कर दिया है. अपने अतिरिक्त किसी दूसरे को अपने पास आने ला...
E & E Group
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बाल मन रविवार विशेषभगवान कृष्ण और अरिश्शुरा...
kumarendra singh sengar
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पता नहीं मानव समाज विकास के किस रास्ते पर है जहाँ मूल कार्यों को करने के लिए भी सरकारों को, सामाजिक संगठनों को आगे आना पड़ता है. कभी स्वच्छता के नाम पर, कभी खुले में शौच न जाने के सम्बन्ध में, कभी शिक्षा के नाम पर, कभी स्तनपान करवाने के नाम पर. आपको शायद आश्चर्य लगे...
kumarendra singh sengar
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मुझ पर दोस्तों का प्यार,यूँ ही उधार रहने दो।बड़ा हसीन है ये कर्ज़,मुझे कर्ज़दार रहने दो।वो आँखें छलकती थीं,ग़म में ख़ुशी में मेरे लिए।उन आँखों में सदा,प्यार बेशुमार रहने दो।मौसम लाख बदलते रहें,आएँ भले बसंत-पतझड़।मेरे यार को जीवन भर,यूँ ही सदाबहार रहने दो। महज़ दोस्...
kumarendra singh sengar
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यूँ तो सभी मौसमों का अपना मजा है. हर मौसम में लोग अपनी तरह से उसका आनंद लिया करते हैं. किसी को गर्मी इसलिए अच्छी लगती है क्योंकि इस मौसम में वे देश-विदेश के बर्फीले स्थानों के भ्रमण का बहाना निकाल लेते हैं. कुछ लोगों को सर्दी इसलिए पसंद आती है क्योंकि उस मौसम का गु...
kumarendra singh sengar
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विगत कई दिनों से लगातार बादल उमड़ रहे थे. काले-काले बादल इस तरह आसमान में विचरण करने लगते मानो अब बरसे कि तब बरसे. कई घंटों की घूमा-फिरी करने के बाद आसमान को अपनी कालिख से मुक्त करते हुए नीला कर जाते और बारिश का मुँह ताकते लोगों को निराश कर जाते. कभी-कभी छुटपुट कुछ...
शिवम् मिश्रा
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नमस्कार साथियो, बच्चियों से साथ लगातार होते आ रहे दुराचार के बीच एक खबर पढ़ने को मिली कि कानपुर में चार नाबालिगों ने चार साल की एक बच्ची के साथ सामूहिक दुराचार किया. इन चारों में से एक की उम्र बारह वर्ष जबकि अन्य तीन की उम्र छह वर्ष से दस वर्ष के बीच है. उन चार...