ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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बहुत याद आता हैअल्हड़पन में लिपटा बचपनबे-फ़िक्री का आलम और मासूम लड़कपन  निकलता था जब गाँव की गलियों से बैठकर पिता जी के कन्धों पर  लगता था मानो छू लिया हो ऊँचा आकाश किलकारी भरकर   खेत-हार घूमकर लौटते थे&nbsp...
kumarendra singh sengar
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आज खबर पढ़ने को मिली कि कानपुर में चार नाबालिगों ने चार साल की एक बच्ची के साथ सामूहिक दुराचार किया. इन चारों नाबालिगों में से एक की उम्र बारह वर्ष बताई गई है जबकि अन्य तीन की उम्र छह वर्ष से दस वर्ष के बीच है. बच्ची के पिता द्वारा की गई रिपोर्ट के बाद उन चारों बच्च...
kumarendra singh sengar
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बालश्रम को रोकने के लिए बाल श्रम ( निषेध एवं विनियमन) संशोधन बिल 2016 सदन में पारित हुआ. सरकारें लगातार इसके उन्मूलन हेतु कार्य करती हैं. देश का संविधान भी बाल श्रम उन्मूलन की बात करता है. इसके अनुच्छेद 23 में खतरनाक उद्योगों में बच्चों के रोजगार को प्रतिबंधित किया...
kumarendra singh sengar
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संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा तीन जून को विश्व साइकिल दिवस मनाये जाने की आधिकारिक घोषणा की जा चुकी है. विश्व स्तर पर इसके आयोजन की तैयारियाँ पूरी होकर आज, तीन जून को इसका आयोजन किया जा रहा है. यातायात के विभिन्न साधनों के बीच साइकिल आज भी अपनी उपस्थिति पुरजोर तरीके से...
PRABHAT KUMAR
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"आँधी-पानी वाला बचपन"दिन भर चिबभी (गांव में पैर से ठिकड़ा मार कर कूद-कूद कर खेले जाने वाला खेल) खेलते हुए रामू और उसकी बहन राम्या कभी न थकते। मम्मी चिल्लाती रहती कि "बेटा लू (गरम वायु) लग जायेगी। पूरी दोपहरिया चिल्ल पों करते रहते हो। थोड़ी देर आराम कर लो" लेकिन इन बा...
kumarendra singh sengar
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हम लोगों के लिए होली का मतलब हमेशा से हुल्लड़ से ही रहा है. उस समय भी जबकि हम छोटे से थे, उस समय भी जब हम किशोरावस्था में कहे जा सकते थे और तब भी जबकि हमें भी बड़ा माना जाने लगा था. हमारे लिए ही नहीं, हमारे पूरे परिवार के लिए होली का मतलब खूब मस्ती, खूब हुल्लड़, खूब ह...
kumarendra singh sengar
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क्या करें, ये जंक फ़ूड के अलावा कुछ खाता ही नहीं, अभी ये महाशय दो साल के नहीं हुए हैं पर कोल्डड्रिंक का स्वाद पहचानते हैं, इन्हें देख लो, मोबाइल इनका सबसे प्यारा खिलौना है, कुछ समझ में नहीं आता कि क्या किया जाये, किसी भी बात की जिद पर रोता-सर पटकने लगता है, ये किसी...
kumarendra singh sengar
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यादें जिंदगी को तरोताजा रखने का काम करती हैं बशर्ते इन्सान उनमें खुशियाँ तलाशने का काम करे. यादों में खुशियों के साथ-साथ ग़मों का भी समावेश होता है और इन्सान जब यादों के सफ़र पर निकलता है तब यह उसकी मानसिकता पर निर्भर करता है कि वह खुशियों में या गम में रहना चाह रहा...
kumarendra singh sengar
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आखिर हमारे बच्चे इतने असुरक्षित क्यों होते जा रहे हैं? बच्चों के साथ अमानवीयता करने वाले इतनी हैवानियत कहाँ से लाते हैं? बच्चों के हत्यारों के सामने क्या उनके बच्चों के चेहरे नहीं उभरते होंगे?  मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने वालों को क्या अपनी मासूम बच्ची...
kumarendra singh sengar
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कल बसंत पंचमी का पर्व है. आज शाम बिटिया रानी के लिए कल के लिए फल-फूल लाने के लिए बाजार की तरफ जाना हुआ. रोज की तरह उसी मंदिर के सामने से गुजरना हुआ जहाँ हम अपने बचपन में बसंत पंचमी के मेले में आया करते थे. यूँ तो उस मंदिर के सामने से जितनी बार गुजरना होता है, बचपन...