ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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कुछ समय पहले एक आलेख प्रकाशित हुआ था, जिसमें हमने ये बताने का प्रयास किया था कि इन्सान की मूल प्रवृत्ति हिंसक है. आदिमानव से लेकर वर्तमान महामानव बनने तक के सफ़र में इन्सान ने बहुत कुछ छोड़ा, बहुत कुछ अपनाया मगर वो अपनी हिंसक प्रवृत्ति को नहीं छोड़ सका. विकास की अवस्थ...
kumarendra singh sengar
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हँसते-खेलते-कूदते कब हाईस्कूल पास कर लिया पता ही नहीं चला. बोर्ड परीक्षाओं का हौवा भी हम मित्रों को डरा न सका था. हाईस्कूल की परीक्षाओं की समाप्ति को हँसते-खेलते-कूदते इसलिए कहा क्योंकि किसी भी विषय की परीक्षा समाप्त होते ही तय हो जाता था कि कितनी देर के खेल के मैद...
अजय  कुमार झा
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आजकल जो दीवानापन युवाओं का मोटरसाईकिल और युवतियों का स्कूटियों के प्रति और बच्चों की ललक भी स्कूटी दौडाने की और दिखाई देती है , ठीक वैसी ही और वैसी ही क्यूँ , बल्कि उससे कहीं ज्यादा (ये भी मैं बताउंगा कि उससे ज्यादा कैसे और क्यूँ ) उन दिनों में हमें और हमारी उम्र क...
Pratibha Kushwaha
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शक्ति पूजन भारतीय संस्कृति और धर्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के एक भाग में नहीं बल्कि पूरे देश में शक्ति के रूप में स्त्री रूप का ही पूजन होता है। नवरात्र इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इन्हीं नवरात्र के दौरान देश के कई मंदिरों में कई वर्षो या यूं कहें कई सौ, हजार...
sanjiv verma salil
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नवगीत*बचपन का अधिकार उसे दोयाद करो बीते दिन अपने देखे सुंदर मीठे सपने तनिक न भाये बेढब नपनेअब अपनास्वीकार उसे दो.पानी-लहरें हवा-उड़ानें इमली-अमिया तितली-भँवरे कुछ नटखटपन कुछ शरारतेंदेखो हँसमनुहार उसे दो. इसकी मुट्ठी में तक़दीरें यह पल भर में हरता पीरें गढ़ता पल-पल नई...
VMWTeam Bharat
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एक लावारिश बिना मां-बाप का बच्चा क्या खुद ही भिखारी बनने का फैसला कर लेता है? बिना किसी छत के भूखे पेट खुले आसमान के नीचे गुजारने वालों की तकदीर में जिल्लत और तिरस्कार के सिवा और क्या होता है तिस पर हमारी मरी हुई संवेदनाओं से निकले लफ़्ज जब उन्हें नसीहत देते हैं तो...
kumarendra singh sengar
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रोज सबेरे आता सूरज, हमको रोज जगाता सूरज.पर्वत के पीछे से आकर, अँधियारा दूर भगाता सूरज. पंछी चहक-चहक कर गाते, सुबह-सुबह जब आता सूरज.ठंडी-ठंडी पवन चले और फूलों को महकाता सूरज. गर्मी में आँख दिखाता हमको,सर्दी में कितना भाता सूरज.पूरब से पश्चिम तक द...
VMWTeam Bharat
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                आज दशहरा है , मै अपने घर से हजार किलोमीटर दूर जॉब करता हूँ जिस वजह से हर दशहरा ,दीपावली और अन्य त्यौहार मै अपने घर वालों के साथ बिताऊं ऐसा संभव नही हो पाता लेकिन आने वाला हर त्यौहार अपने परिवार के साथ बता...
Manoj Kumar
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 पोस्ट लेवल : बचपन
kumarendra singh sengar
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साक्षर, सुसंस्कृत पीढ़ी निर्माण का संकल्प है मगर उसी पीढ़ी को सुरक्षित नहीं रख पा रहे हैं जिसको साक्षर, सुसंस्कृत बनाना है. आये दिन समाज में बच्चों-बच्चियों के साथ हो रही वारदातें सामने आ रही हैं. कुछ दिनों तक आक्रोशित दिखाई देने के बाद हम सभी अपने-अपने में सिमट जाते...