ब्लॉगसेतु

Ravindra Pandey
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मैं ढूंढ रहा उस बचपन को,जाने कब कैसे फिसल गया...रुकने को बोला था कितना,देखो वो जिद्दी निकल गया...अब की बार जो मिल जाये,मैं उसकी कान मरोडूँगा...कितना भी फिर वो गुस्साये,नहीं उसकी बाँह मैं छोडूंगा...लेकिन वो निश्छल बचपन भी,कब लौट के फिर आ पाता है...अक्सर फिर छोटे बच्...
Kavita Rawat
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 पोस्ट लेवल : कविता बचपन रक्षाबंधन
Ravindra Pandey
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कहती हैं दर-ओ-दीवारें सभी,फिर कब वो मौसम आयेगा...मैं झूम उठूँगा बरबस ही,बचपन आँगन में समायेगा...वो खुली गगन के नीचे सब,फिर खाट लगाकर सोएंगे...जब डाँट पड़ेगी नानी की,चिल्ला चिल्ला कर रोयेंगे...फिर मामी यूँ पुचकारेगी,मुठ्ठी में शक्कर डारेगी...मौसी देखेगी कनखियों से,बि...
kumarendra singh sengar
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आज एक जुलाई है. सभी हिन्दी ब्लॉगर ख़ुशी मना रहे हैं, अन्तर्राष्ट्रीय ब्लॉगर डे मनाए जाने की. उधर सरकार और इनके सहयोगी-समर्थक प्रसन्नता दर्शा रहे हैं, देश में एक क़ानून के आधी रात से लागू होने की. जी हाँ, आज एक जुलाई से ही देश में एक कर व्यवस्था GST लागू कर दी गई है...
 पोस्ट लेवल : यादें कविता बचपन
मुकेश कुमार
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बेवजह मुस्कुराते हुए पापाइनदिनों खिलखिलाते नहीं हैंआजकल बिना गुस्सा कियेबच्चो से इतराते हुएनकार देते हैं, हम सबकी कही बातों कोशायद वे ऐसा करकेअपने दर्द को जज्ब करते हुएदूसरे पल ही देखते हैं नई जिंदगीसबसे प्यारा लगता है,जब वो मम्मी के बातों को करते हैं अनसुनाफिर मम्...
VMWTeam Bharat
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देवरिया, लार थाना के हरखौली निवासी मास्टर सिद्धेश पाण्डेय उर्फ यश बाबा को शहर के कार्यक्रम देवरिया महोत्सव 2017 में देवरिया रत्न अवार्ड प्रदान कर सम्मानित किया गया। VMW Team के सिद्धेश के जयपुर में होने के कारण अवार्ड उनके बड़े भाई बैंक मैनेजर योगेश पाण्डेय ने ग्रह...
Krishna Kumar Yadav
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आधुनिक दौर में बच्चों में अध्ययन के प्रति समर्पण के साथ-साथ रचनात्मकता होना भी बहुत जरूरी है। यह रचनात्मकता ही हमें जिज्ञासु बनाती है और संवेदनशीलता को बरकरार रखती है। इसके लिए हमारे भीतर का बचपन जिन्दा रहना चाहिए। उक्त उद्गार राजस्थान पश्चिमी क्षेत्र, जोधपुर के नि...
अर्चना चावजी
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सारी दौलत तो क्या, लुटा दूं मैं अपनी जान लाने को मेरे बच्चों के होठों पर हलकी-सी मुस्कान !बालदिवस विशेष !- 
 पोस्ट लेवल : बचपन
अर्चना चावजी
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न मुन्ना न ! आज नहीं कल ले लेंगे नया खिलौनाये वाला अच्छा नहींकहकर बच्चे को समझानाबिटिया से कहना कि -बस वो जो तीसरी लाईट दिख रही है न! उस तक पैदल चलवहां से रिक्शा में बैठनापरेशानियों की कड़के की धूप में तलाशते हुए छईयाँ एक लाचार माँ ही बता सक...
 पोस्ट लेवल : बस यूंही बचपन
शरद  कोकास
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जीवनानुभव को रचनानुभव में बदलने की कीमियागरी दिन -प्रतिदिन के अनुभव-अनुभव शब्द से हम सभी वाकिफ हैं ।जीवन में हमें अनेक अनुभव होते हैं । हम सुबह जागते हैं तो हमे सूर्य उगता दिखाई देता है । हम रोज़मर्रा के कामों की शुरुआत करते हैं । हमें उस दिन की रोटी का प्रबन्ध...