ब्लॉगसेतु

मनोज कुमार  भारती
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एक दिन वह गांव की कच्ची गलियों में अपने हमउम्र  बच्चों के साथ खेल रहा था। खेलते-खेलते वह नीम की छांव तले  आ गया। पीछे-पीछे उसका दोस्त सुरेश भी आ गया। वह जमीन में देखने लगा। जमीन कभी गारे-गोबर से लीपी गई थी। जमीन में उसे दो चीज़ें दिखाई दी। जो गारे-गोबर के...
kumarendra singh sengar
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आये दिन मासूम बच्चों द्वारा आत्महत्या करने की खबरें सुनने को मिल रही हैं. आठ-दस वर्ष के बच्चों द्वारा आत्महत्या करना किसी भी रूप में नजरअंदाज करने वाली स्थिति नहीं है. इसके मूल कारक को समझना ही होगा. जैसे-जैसे विकास की राह प्रशस्त हुई है वैसे-वैसे अभिभावकों की महत्...
kumarendra singh sengar
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तमाम विरोधों के बाद अंततः बाल श्रम ( निषेध एवं विनियमन) संशोधन बिल 2016 सदन में पारित हो ही गया. बाल श्रम से तात्पर्य ऐसे कार्यों से है जिसको करने वाला व्यक्ति कानूनन निर्धारित उम्र से कम होता है. बाल श्रम को वैश्विक स्तर पर नकारात्मक दृष्टि से देखा जाता है. भारत म...
kumarendra singh sengar
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जुलाई माह आते ही सरकारी विद्यालयों के साथ-साथ निजी विद्यालयों में भी स्कूल चलें हम जैसे कार्यक्रमों का आयोजन होने लगता है. वैसे निजी स्कूल स्कूल भरने का कार्य अब तो अप्रैल में करने लगे हैं, इसके बाद भी सरकारी गुडबुक में बने रहने के लिए, अधिकारियों की निगाह में बने...
kumarendra singh sengar
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रात का समय, घड़ी नौ से अधिक का समय बता रही थी. झमाझम बारिश हो जाने के बाद हल्की-हल्की फुहारें अठखेलियाँ करती लग रही थीं. स्ट्रीट लाइट के साथ-साथ गुजरते वाहनों की हेडलाइट भी सड़क को जगमग कर रही थी. गीली सड़क पर वाहनों और लोगों की आवाजाही के बीच मद्धिम गति से चलती बाइक...
Manisha Sharma
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बचपन की ये लाइन्स .जिन्हे हम दिल से गातेगुनगुनाते थे ..और खेल खेलते थे ..!!तो याद ताज़ा कर लीजिये ...!!▶  मछली जल की रानी है,       जीवन उसका पानी है।       हाथ लगाओ डर जायेगी       बाहर निकालो मर ज...
 पोस्ट लेवल : बचपन याद
kumarendra singh sengar
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शाम का धुंधलका होते ही घर के पास बने कुंए से पानी खींचना और घर के सामने की जगह पर छिड़क कर जमीन की गर्मी, धूल को दबाने का काम शुरू हो जाता. कई-कई बाल्टी पानी खींचना, कई-कई बार का चक्कर लगाना, जमीन की दिन भर की गर्मी को शांत करने की सफल कोशिश के बाद मिट्टी की सोंधी-स...
 पोस्ट लेवल : गाँव आपदा बचपन समाज
मधुलिका पटेल
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माँ तुम्हारी परछाई कोधीरे धीरे अपने मेंसमाहित होते देख रही हूँ बचपन का खेलतुम्हारी बिंदी और साड़ी से अपने को सजाना फिर कुछ वर्षों बादतुम्हारी जिम्मेदारियों में तुम जैसा बन्ने कीकोशिश में तुम्हाराहाथ बटानाजब विदा हुई नए परिवेश मेंतब हम तुम एक परछा...
kumarendra singh sengar
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देश भर में संचालित अनेक परीक्षा-संगठनों के परीक्षा परिणाम घोषित किये गए. अनेकानेक बच्चों ने सफलता प्राप्त की. खबरों में बच्चों के चहकने के, परिजनों संग, शिक्षकों संग उनके  चित्र लगातार सुर्ख़ियों में रहे. कोई इंजीनियर, कोई चिकित्सक, कोई प्रशासनिक अधिकारी, कोई व...
सर्जना शर्मा
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आम नहीं केवल आम , ये है रिश्तों और भावनाओं की मीठी मीठी याद ---( जिन्ने अम्बियां ते अम्ब नीं खाए , ओ जम्मया नहीं )आम का मौसम है कच्ची अंबिया लग चुकी हैं बाज़ार में रसायनों से पके आम आ चुके हैं लेकिन डाल पर पका आम अभी नहीं आया है । कल फेस बुक पर अपने बहुत पुरान...