ब्लॉगसेतु

मधुलिका पटेल
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ये कहकर गया था जब अबकी बार आउंगामाँ गोद में तेरी सर रख कर जी भरकर सोउँगा ।लाल मेरा तू तो है भारत माता का प्रहरीइसीलिये नींद तेरी रहती थीं आँखों से ओझलकभी न वो तेरी पलकों में ठहरी ।पर माँ का दिल आज अचानक से दरक गयाक्यों आज पूजा का थाल हाथ से सरक गया ।जहां कहीं मेरे...
kumarendra singh sengar
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जीवन में कोई व्यक्ति अपने भविष्य को लेकर निरंतर सजग रहता है, लगातार आगे बढ़ने का प्रयास करता है और इस यात्रा में, अपनी सजगता में वो अपने अतीत को विस्मृत नहीं कर पाता है। ये और बात है कि जिंदगी की आपाधापी में इन्सान ने अपने अतीत को स्वतः याद करना बंद सा कर दिया है क...
 पोस्ट लेवल : यादें बचपन
kumarendra singh sengar
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बचपन से साथ निभाती चली आई स्याही के कार्यों पर हमेशा से गर्व का अनुभव होता रहा है. उसके पीछे बहुत बड़ा कारण ये रहा कि हमने और लोगों की तरह स्याही के कार्य को महज लेखन से ही नहीं जोड़े रखा. स्याही जैसी बहुआयामी प्रतिभा को हमने न तो बचपन में नियंत्रित रखा और न ही कभी उ...
Kailash Sharma
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पल पल कर बीत चला,जीवन घट रीत चला।बचपन था कब आया,जाने कब बीत गया।औरों की चिंता मेंयौवन रस सूख गया।अब जीवन है सूना,पीछे सब छूट चला।ऊँगली जो पकड़  चला,उँगली अब झटक गया।मिलता अनजाना सा,जैसे कुछ अटक गया।जीवन लगता जैसे,हर पल है लूट चला।सावन सी अब रातें,मरुथल सा दिन ग...
kumarendra singh sengar
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समाज जिस तरह के एकांगी होता जा रहा है, उसका सर्वाधिक असर परिवार पर दिखाई दे रहा है. इसमें भी कहें कि परिवार के सबसे छोटी इकाई ‘बच्चों’ पर ये एकांगीपन सर्वाधिक दुष्प्रभाव डाल रहा है तो कोई अतिश्योक्ति न होगी. देखने में आ रहा है कि बहुसंख्यक परिवारों ने अपने आपको सी...
मधुलिका पटेल
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माँ मुझे आज भी तेरा इंतज़ार है पता नही क्यों ?तू आती है मिल्ती है और प्यार भी बहुत करती है तुझे मेरी फिक्र भी है पर मुझे तेरा इतंज़ार है कल कोइ मुझसे पूछ रहा था अरे पागल कैसा तेरा ये इतंज़ार हैमैं तुम्हें नहीं बता सकतीबात बरसों पुरानी...
kumarendra singh sengar
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इंसान की जिन्दगी में बहुत सी स्थितियाँ ऐसी होतीं हैं जब वह एकदम असहाय होता है और इस तरह की स्थितियों से बाहर आने के लिए वह कुछ भी कर बैठता है। ऐसी विषम स्थिति किसी भी व्यक्ति के जीवन में कई बार भूख के कारण भी आती है। वैसे भी कहा गया है कि पेट जो न कराये वह कम है। भ...
kumarendra singh sengar
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दशहरे पर रावण का पुतला जलाने के साथ आतिशबाजी चलाने की जो शुरुआत होती वो दीपावली गुजर जाने के बाद भी लगभग एक सप्ताह तक चलती रहती. आश्चर्य होता है आज के बच्चों को ये सुनकर कि हम बचपने में बीस-पच्चीस दिनों तक दीपमालिके पर्व का आनंद पूरे उल्लास से मनाते रहते थे. दशहरा...
kumarendra singh sengar
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घर में जैसे ही साफ़-सफाई जोर-शोर से होते दिखने लगती; बरामदे का एक कोना रगड़-रगड़ कर धोया जाने लगता; अम्मा की सक्रियता आम दिनों की अपेक्षा और अधिक दिखाई देने लगती तो समझ में आने लगता कि नवरात्रि का पावन पर्व आने वाला है. इसकी पुष्टि होते ही हम बच्चों में अम्मा की सक्रि...
kumarendra singh sengar
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‘जब भी ये दिल उदास होता है, जाने कौन आसपास होता है’ किसी गीत की ये पंक्तियाँ दिल के उदास होने पर किसी अपने के अस्तित्व के होने की गवाही दे रही हैं. दिल के उदास होने और उस उदासी में किसी अपने के पास होने की अभिलाषा करना इंसान को इंसान से जोड़े रखने की संकल्पना को पुष...