ब्लॉगसेतु

मधुलिका पटेल
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कभी फादर्स डे कभी मदर्स डेहर साल आते हैं सब कुछ मिलता है बाज़ारों में उपहारों के लिए पर नहीं मिलता तो वो वादों के शब्दजो चाहिए होते हैं हर माता - पिता को क्योंकि वो दुकानों में नहीं दिलों में बिकते हैं और एक आश्वासन और विश्वास कीनज़रों के न...
Sanjay  Grover
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उनसे मैं बहुत डरता हूं जो वक़्त पड़ने पर गधे को भी बाप बना लेते हैं। इसमें दो-तीन समस्याएं हैं-1.     बाप बनना बहुत ज़िम्मेदारी का काम है। ऐसे ज़िम्मेदार बाप का दुनिया को अभी भी इंतेज़ार है जो सोच-समझ के बच्चा पैदा करे। वैसे जो सोचता-समझता होगा...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लइक बच्चे नेजब देखलियाइक बच्चे नेसब देखलियाये बड़े तोबिलकुल छोटेहैं!इक बच्चे नेकब देखलिया ?अब किससे छुपतेफिरते हो?इक बच्चे नेजब देखलियाअब क्या रक्खाहै क़िस्सोंमेंइक बच्चे नेजब देखलियाजब करते थेऊंचा-नीचातुम्हे बच्चे नेतब देखलियाअब हैरां होतो होतेरहोइक बच्चे नेतो दे...
Madabhushi Rangraj  Iyengar
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आज दिन में एक वाट्सप फ्रेंड ने यह आँखों देखी खबर भेजा. आप सब के रसास्वादन हेतु प्रस्तुत है... आँखों देखी     एक चिड़ा लगातार कोशिश कर रहा है      अपने बच्चे को उड़ना सिखाने की              &...
Sanjay  Grover
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‘अगर आपको भगवान के होने का सबूत चाहिए तो इस वीडियो को देखिए’ऐसा ही कुछ फ़ेसबुक पर लगे एक वीडियो के ऊपर स्टेटस में लिखा था, नीचे वीडियो में एक छोटा बच्चा सड़क पर अपना किनारा छोड़कर डिवाइडर की तरफ़ भाग पड़ता है। गाड़ियां धीरे-धीरे चल रहीं हैं, शायद लाल बत्ती अभी-अभी हरी हु...
विजय राजबली माथुर
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केवल राम
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गत अंक से आगे.....आम जनमानस बोली में ही अपने भावों को अभिव्यक्त करने की कोशिश करता है, उसके जीवन का हर पहलू बोली के माध्यम से बड़ी खूबसूरती के साथ अभिव्यक्त होता है. हम अगर भाषा का गहराई से अध्ययन करते हैं तो पाते हैं कि भाषा में प्रयुक्त कुछ शब्द भाव सम्प्रेषण में...
Kailash Sharma
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चढ़ते ही कुछ ज्यादा सीढ़ी अपनों सेहो जाते विस्मृत संबंध व रिश्ते,निकल जाते अनज़ान हो करबचपन के हमउम्र साथियों सेजो खेल रहे होते क्रिकेटनज़दीकी मैदान में।खो जाती स्वाभाविक हँसीबनावटी मुखोटे के अन्दर,खो जाता अन्दर का छोटा बच्चाअहम् की भीड़ में।विस्मृत हो जातीं पिछली सीढिय...
Kailash Sharma
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बढ़ते ही कुछ आगे सीढ़ियों पर हो जाते विस्मृत संबंध व रिश्ते,निकल जाते अनज़ान हो करबचपन के हमउम्र साथियों से जो खेल रहे क्रिकेटनज़दीकी मैदान में।खो जाती स्वाभाविक हँसीबनावटी मुखोटे के अन्दर,खो जाता अन्दर का छोटा बच्चाअहम् की भीड़ में।विस्मृत हो जातीं पिछली सीढ़ि...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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किसी ने बताया क्यों नहीं था बचपन लौट कर नहीं आता बचपन का मंज़र फिर कभी नहीं दिखता वो बेफिक्री में जीना वो बेबाक हँसना झगड़ कर मिलना मिल कर झगड़ना ना भावनाओं का सागर ना कुंठाओं के पर्वत ना जात पात ना देश धर्म का झंझट न कम ज्यादा का चक्कर सब का प्यार दुलार हर आँख का...