ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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आज के तकनीक भरे दौर में जबकि लोग मशीनों पर ज्यादा निर्भर हो चुके हैं, ऐसे में कोई किताबों की बात करे तो आश्चर्य लगता है. इस आश्चर्य में उस समय और भी वृद्धि हो जाती है जबकि पता चलता है कि महज किताबों की बात नहीं की जा रही वरन बच्चों में किताबें पढ़ने के प्रति ललक पैद...
kumarendra singh sengar
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पिछले दिनों वर्तमान परिदृश्य में तनाव मुक्त शिक्षा विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता करने का अवसर मिला. ऐसे विषय जो किसी न किसी रूप में मनोविज्ञान से जुड़े होते हैं, उन पर चर्चा करना, उनका अध्ययन करना शुरू से हमें पसंद आता रहा है. महाविद्यालय के विद्यार्थियों...
sanjiv verma salil
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नवगीत *बारिश तो अब भी होती है लेकिन बच्चे नहीं खेलते. *नाव बनाना कौन सिखाये?बहे जा रहे समय नदी में.समय न मिलता रिक्त सदी में.काम न कोईकिसी के आये.अपना संकट आप झेलतेबारिश तो अब भी होती हैलेकिन बच्चे नहीं खेलते.*डेंगू से भय-भीत सभी हैं.नहीं भरोसा...
kumarendra singh sengar
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सावन का मौसम अपने आपमें अनेक तरह की रागात्मक क्रियाएं छिपाए रहता है. रक्षाबंधन का पावन पर्व, पेड़ों पर डाले गए झूले, उनमें पेंग भरते हर उम्र के लोग, गीत गाते हुए महिलाओं का झूलों के सहारे आसमान को धरती पर उतार लाने की कोशिश. सामान्य बातचीत में जब भी सावन का जिक्र हो...
शिवम् मिश्रा
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नमस्कार साथियो, स्कूल जाते बच्चों की गर्मियों की छुट्टियाँ हो गईं हैं. इसके बाद भी बच्चे तनावमुक्त नहीं दिख रहे हैं. वे प्रफुल्लित नहीं दिख रहे हैं. छुट्टियों के उत्साह में, उल्लास में, मस्ती में, शरारत में, शैतानियों में वे नहीं दिख रहे हैं. मोहल्ले में, बाजार में...
kumarendra singh sengar
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सूरत की बिल्डिंग में लगी आग सिर्फ वहाँ की अव्यवस्था की निशानी नहीं है बल्कि वहाँ तमाशबीन बने नागरिकों के संवेदनहीन होने की तथा सरकारी तंत्र की नाकामी की भी निशानी है. आग लगने के बाद जिस तरह से उस इमारत की चौथी मंजिल से बच्चे कूदते दिखाई दे रहे थे, वह घबराहट पैदा कर...
kumarendra singh sengar
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बच्चों की गर्मियों की छुट्टियाँ हो गईं. छुट्टियाँ होने के बाद भी बच्चे तनावमुक्त नहीं दिख रहे हैं. वे प्रफुल्लित नहीं दिख रहे हैं. उत्साह में, उल्लास में, मस्ती में, शरारत में, शैतानियों में नहीं दिख रहे हैं. उनके चेहरों पर आज भी वैसा ही तनाव दिख रहा है जैसा कि स्क...
 पोस्ट लेवल : मौज-मस्ती बचपन बच्चे
ज्योति  देहलीवाल
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प्यारे बच्चों, अनेक शुभाशिर्वाद एवं ढेर सारा प्यार! अक्सर किसी भी स्टूडेंट की काबिलियत का पैमाना उसके मार्क्स को माना जाता हैं। अच्छे कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए अच्छे मार्क्स होना बहुत ज़रुरी भी हैं। लेकिन यदि तुम्हारे कुछ मार्क्स कम आएं हैं त...
VMWTeam Bharat
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भारतवर्ष मेधा की खान है । आदि गुरु शंकराचार्&#235...
ज्योति  देहलीवाल
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डर एक ऐसा काल्पनिक झूठ हैं, जिसका वास्तविक जिंदगी से कोई लेना-देना न होने के बावजूद इस काल्पनिक झूठ से इंसान को जिंदगी में कई समस्याओं से रुबरु होना पड़ता हैं। बच्चों के अंदर जितने भी डर होते हैं, वो ज्यादातर घर के बड़े-बुजुर्गों से, रिश्तेदारों से या माता-पिता से ही...