ब्लॉगसेतु

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--नीलगगन पर कुहरा छाया, दोपहरी में शाम हो गई।शीतलता के कारण सारी, दुनियादारी जाम हो गई।।--गैस सिलिण्डर से ग़ायब है, लकड़ी गायब बाज़ारों से,कैसे जलें अलाव यही सब, पूछ रहे हैं सरकारों से,जीवन को ढोनेवाली अब, काया भी नाकाम हो गई।शीतलता के...
सुशील बाकलीवाल
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        इन दिनों वॉट्सएप पर एक मैसेज चलन में बना हुआ है जिसमें वर्षों बाद उन्नति के ऊंचे शिखर पर स्थापित एक छात्र अपने पूर्व प्रोफेसर से मिलने पर उसका धन्यवाद करते हुए कहता है कि सर आज मैंने जो कुछ भी हासिल किया है वो आपकी उस एक दिन की उदारता का...
अनीता सैनी
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शिकवा करूँ न करूँ तुमसे शिकायत कोई, बिखर गया दर्द, दर्द का वह मंज़र लूट गया,  समय के सीने पर टांगती थी शिकायतों के बटन, राह ताकते-ताकते वह बटन टूट गया |मज़लूम हुई मासूम मोहब्बत ज़माने की,   भटक गयी राह अच्छे दिनों के दरश को तरस...
shashi purwar
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कुर्सी की पूजा करें, घूमे चारों धामराजनीति के खेल में , हुए खूब बदनामदीवारों को देखते, करते खुद से बातएकाकी परिवार के , बिगड़े से हालातएकाकी मन की उपज, बिसरा दिल का चैनसुख का पैमाना भरो , बदलेंगे दिन रैनमोती झरे न आँख से, पथ में बिखरे फूलसुख पैमाना तोष का , सूख...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) भाजपाइयों के साथ अलग और गैर - भाजपाइयों के साथ अलग व्यवहार करने का पुलिस को निर्देश होगा इन दोनों घटनाओं से तो यही सिद्ध होता है ------ संकलन...
anamika ghatak
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अश्कों को आँखों का ठौर पसन्द नहींउसे पूरी दुनिया से है वास्ता, हद हैकर भी लूँ नींदों से वाबस्ताख़्वाब बन जाता है हरजाई हद है  रिंदो साक़ी ने झूम के पिलाया जोघूँट पानी का न उतरा हद हैकर ली खूब मेहमाननवाज़ी भी हमनेहुए फिर भी बदनाम हद हैदो दिन ज़िन्दगी के चांदनी के च...
Sanjay  Grover
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कोई पांच-एक साल पहले की बात है एक व्यक्ति के बयान पर तथाकथित हंगामा खड़ा हो गया। उस व्यक्ति का नाम मैंने पहली बार उसी दिन सुना था। शहर भी छोटा ही था जहां बिना मतलब कोई आता-जाता नहीं है। इधर मेरे कॉमन सेंस ने मेरे लिए समस्या पैदा कर दी, हमेशा ही करता है। मैंने सोचा क...
Sanjay Chourasia
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इंद्रधनुष सात रंगों से बना होता है और यही सात रंग इंसान के जीवन में जन्म से लेकर मृत्यु तक साथ होते हैं ! इंसान के चरित्र का वर्णन , उसके व्यवहार , अच्छाई , बुराई , ख़ुशी - गम , सुख-दुःख , शांति - अशांति , सहयोग में - विरोध में, हर जगह इन्हीं रंगों की उपमा...
 पोस्ट लेवल : रंग हैपी होली बदनाम
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
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यह दोस्ती हम नहीं छोड़ेंगे... प्रिय पाठकों, आज दोस्ती के मायने बदल चुके हैं. आप दोस्ती जैसे पवित्र नाम को बदनाम करती लड़कियों से सावधान रहे. आज मेरी फेसबुक पर एक लड़की से हुए वार्तालाप में मेरा अनुभव नीचे देखें और सच्ची दोस्ती की परिभाषा को व्यक्त करता मेरा ब्लॉग द...
पत्रकार रमेश कुमार जैन उर्फ निर्भीक
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क़ानूनी समाचारों पर बेबाक टिप्पणियाँ (2) प्रिय दोस्तों व पाठकों, पिछले दिनों मुझे इन्टरनेट पर हिंदी के कई लेख व क़ानूनी समाचार पढने को मिलें.उनको पढ़ लेने के बाद और उनको पढने के साथ साथ उस समय जैसे विचार आ रहे थें. उन्हें व्यक्त करते हुए हर लेख के साथ ही अपने अनुभव के...