ब्लॉगसेतु

Basudeo Agarwal
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बह्र:- 2222 2222 2222 222ग़म पी पी कर दिल जब ऊबा, तब मयखाने याद आये,तेरी आँखों की मदिरा के, सब पैमाने याद आये।उम्मीदों की मिली हवाएँ जब भी दिल के शोलों को तेरे साथ गुजारे वे मदहोश ज़माने याद आये।मदहोशी में कुछ गाने को जब भी प्यासा दिल मचला, तेरा हाथ पकड़ जोे...
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बहरे मीर:- 22  22  22  2कब से प्यासे नैना दो,अब तो सूरत दिखला दो।आज सियासत बस इतनी,आग लगा कर भड़का दो।बदली में ओ घूँघट में,छत पर चमके चन्दा दो।आगे आकर नवयुवकों,देश की किस्मत चमका दो।दीन दुखी पर ममता का,अपना आँचल फैला दो।मंसूबों को दुश्मन के,ज्वाला बन...
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22  22  22  22जग में जो भी आने वाला,वह सब इक दिन जाने वाला।कौन निभाये साथ दुखों में,हर कोई समझाने वाला।साथ चला रहबर बन जो भी,निकला ख़ार बिछाने वाला।लाखों घी डालें जलती में,बिरला आग बुझाने वाला।आज कहाँ मिलता है कोई,सच्ची राह दिखाने वाला।ऊपर से ले नीचे...
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बह्र:- 22  22  22  22  22  2साथ सजन तो चाँद सुहाना लगता है,दूर पिया तो फिर वो जलता लगता है।मन में जब ख़ुशहाली रहती है छायी,हर मौसम ही तब मस्ताना लगता है।बच्चों की किलकारी घर में जब गूँजे,गुलशन सा घर का हर कोना लगता है।प्रीतम प्यारा जब से ही...
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बह्र:- 2222 2222 2222 222गदहे को भी बाप बनाऊँ कैसी ये मज़बूरी है,कुत्ते सा बन पूँछ हिलाऊँ कैसी ये मज़बूरी है।एक गाम जो रखें न सीधा चलना मुझे सिखायें वे,उनकी सुन सुन कदम बढ़ाऊँ कैसी ये मज़बूरी है।झूठ कपट की नई बस्तियाँ चमक दमक से भरी हुईं,अपना घर में वहाँ बसाऊँ कैसी ये...
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बह्र:- 22  22  22  22कोरोना का क्यों रोना है,हाथों को रहते धोना है।दो गज की दूरी रख कर के,सुख की नींद हमें सोना है।बीमारी है या दुनिया पर,ये चीनी जादू टोना है।यह संकट भी टल जायेगा,धैर्य हमें न जरा खोना है।तन मन का संयम बस रखना,चाहे फिर हो जो होना है।...
Basudeo Agarwal
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बह्र:- 22  22  22  22  22  2खुशियों ने जब साथ निभाना छोड़ दिया,हमने भी अपने को तन्हा छोड़ दिया।झेल गरीबी को हँस जीना सीखे तो,गर्दिश ने भी साथ हमारा छोड़ दिया।हमें पराई लगती ये दुनिया जैसे,ग़ुरबत में अपनों ने पल्ला छोड़ दिया।थोड़ी आज मुसीबत सर पे...
Basudeo Agarwal
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2*15जीभ दिखा कर यारों को ललचाना वो भी क्या दिन थे,उनसे फिर मन की बातें मनवाना वो भी क्या दिन थे।साथ खेलना बात बात में झगड़ा भी होता रहता,पल भर कुट्टी फिर यारी हो जाना वो भी क्या दिन थे।डींग हाँकने और खेलने में जो माहिर वो मुखिया,ऊँच नीच का भेद न आड़े आना वो भी क्या द...
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प्रधान मंत्री मोदी जी की कविता की पंक्ति से प्रेरणा पा लिखी ग़ज़ल।अभी तो सूरज उगा है,छिटकी पूर्व से प्रभा है।भानु ये होता प्रखरतर,आकाश में बढ़ चला है।अब तलक जो नींद में थे,उन सब को जगा दिया है।सबका विकास व विश्वास,सबके साथ पर टिका है।तमस की विभावरी गयी,छा गया अब उजाला...
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2*7 (नेताओं पर मुसलसल ग़ज़ल)माल पराया खाएँ हम,नेता तब कहलाएँ हम।नाटक जनता से कर के,आँसू खूब बहाएँ हम।देश भले लुटता जाए,अपनी फ़िक्र जताएँ हम।अपनी तो तिकड़म सारी,कैसे कुर्सी पाएँ हम।'नमन' किसे परवाह यहाँ,भाएँ या ना भाएँ हम।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया2-5-19