ब्लॉगसेतु

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ढंग निराले होते जग में,  मिले जुले परिवार के।देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-नाते प्यार के।।--चमन एक हो किन्तु वहाँ पर, रंग-विरंगे फूल खिलें,मधु से मिश्रित वाणी बोलें, इक दूजे से लोग मिलें,ग्रीष्म-शीत-बरसात सुनाये, नगमे सुखद बहार के।देते हैं आनन्द अनोखा, रिश्ते-न...
 पोस्ट लेवल : नगमे सुखद बहार के गीत
Saransh Sagar
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पुणे पुलिस के संदीप सूर्यवंशी का गाना हो रहा है वायरल !.facebook-responsive { overflow:hidden; padding-bottom:75.25%; position:relative; height:0; } .facebook-responsive iframe { left:0; top:0; height:100%; width:100%; position:...
Saransh Sagar
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अनीता सैनी
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उन  पथरायी-सी आँखों  पर, तुम प्रभात-सी मुस्कुरायी,  मायूसी में डूबा था जीवन मेरा तुम बसंत बहार-सी बन आँगन में उतर आयी,  तलाश रहे थे ख़ुशियाँ जहां में,  मेहर बन हमारे दामन में तुम खिलखिलायी |चमन में मेरे सितारों-सी चह...
अनीता सैनी
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बरसी न बदरिया न मुलाक़ात बहारों से की,  न तितलियों ने ताज पहनाया न  फुहार ख़ुशियों ने की,   मिली न सौग़ात सितारों की, ढलती शाम में वह कोयल-सी गुनगुनायी,    मुद्दतों बाद आज मेरी दहलीज़ मुस्कुरायी, &nb...
Saransh Sagar
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अरे रे अरे ये क्या हुआ - Are Re Are Ye Kya Huaमूल गीत तो फिल्म दिल तो पागल है के लिएसंगीतकार उतम सिंह जी के निर्देशन में उदित नारायण व लता जी ने गाया है !गीत आनंद बक्षी जी का लिखा हुआ है ।अरे रे अरे ये क्या हुआ, मैने ना ये जानाअरेरे अरे बन जाए ना, कहीं कोई अफ़साना...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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तितली सोयी बरखा बहार थी गरजे मेघ टूटा सपना बिखरी थी तन्हाई क्रुद्ध दामिनी पवन चली गजरा उड़ाकर पिया को देने काले बादल होने लगे ओझल मयूर नाचे आना दोबारा  साथ हों जब पिया सुनो  बहार ©...
 पोस्ट लेवल : बरखा बहार (हाइकु)
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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छाया बसंत है बसंत-बहार मुदित जिया महका बाग़ चहकी कली-कली कूकी कोयल बौराये आम झूमी पीली सरसों मिले साजन मस्त फ़ज़ाऐं गुनगुनी धूप है हरे शजर ढाक-पलाश सुर्ख़ हुआ जंगल महके फूल खिला बाग़ीचा फूलो...
Bharat Tiwari
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डॉ अश्विन दलवी से सवाल-जवाबराजस्थान ललित कला अकादमी के चेयरमैन डॉ अश्विन दलवी देश के प्रसिद्ध एवं स्थापित सुरबहार वादकों में से एक हैं. वे “नाद साधना इंस्टिट्यूट फॉर इंडियन म्यूजिक एंड रिसर्च सेंटर” के सचिव भी हैं. उन्होंने सुरों को साधा है और अब राजस्थान ललित कला...
Yashoda Agrawal
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बूंदी पानी की हूं थोड़ी-सी हवा है मुझ मेंइस बिज़ाअत पे भी क्या तुर्फ़ां इना है मुझ मेंये जो इक हश्र शबो-रोज़ बपा है मुझ मेंहो न हो और भी कुछ मेरे सिवा है मुझ मेंसफ़्हे-दहर पे इक राज़ की तहरीर हूं मैंहर कोई पढ़ नहीं सकता जे लिखा है मुझ मेंकभी शबनम की लताफ़...