ब्लॉगसेतु

Kajal Kumar
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Kajal Kumar
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 पोस्ट लेवल : din बाढ़ Flood अच्‍छे achhe दि‍न
जन्मेजय तिवारी
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                   सुबह से ही करीमन की दुकान पर भीड़ उमड़ने लगी थी । आस-पास के सभी लोग तो लेट-लतीफ ट्रेनों की तरह काफी पीछे चल रहे थे । उनके लिए तो उसकी दुकान पर जाना रोजमर्रा की ही बात थी । उन्हें लगा कि रोज व...
जन्मेजय तिवारी
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                      साधो, वर्षा ऋतु आते ही हमारे यहाँ धर्म-कर्म कुछ ज्यादा ही बढ़ जाते हैं । आम जन-किसान पूजा-पाठ-हवन और यज्ञादि करने लगते हैं । प्रयोजन ऊपर वाले को रुष्ट हो...
Kajal Kumar
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अशोक पाण्‍डेय
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अशोक पाण्‍डेय
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kumarendra singh sengar
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आपदाओं पर आपदाएँ आती जाती हैं, चली जाती हैं, हम साल-दर-साल इन आपदाओं में मारे गए लोगों को, हताहत हुए लोगों को याद कर लेते हैं और फिर से नई आपदा के आने का इंतज़ार सा करने लगते हैं। एक के बाद एक होती आपदाओं से भी हम सीखने का प्रयास नहीं करते हैं। हर आपदा के बाद प्रकृ...
kumarendra singh sengar
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उत्तराखंड की आपदा, केदारनाथ की तबाही से प्रभावित इंसानों ने अपना बहुत कुछ गंवाया है, अपने परिवार को खोया है. वहां रह रहे लोगों ने एक तरह से अपने वजूद को भी गंवाया है. हर गलती इन्सान को कुछ न कुछ सीखने का अवसर देती है. हर संकट से बाहर निकलने के रास्ते मिलते हैं, सं...
kumarendra singh sengar
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ऐसा लग रहा है जैसे हमारे देश में प्राकृतिक आपदा पहली बार आई हो. सभी चिंतातुर हैं, मीडिया से लेकर समाजसेवी तक, राजनेता से लेकर आम आदमी तक किन्तु कुछ सीखेंगे नहीं. जिस-जिस के हाथ में कैमरा है, जिस-जिस के पास इंटरनेट है, जिस-जिस के सामने टीवी खुला हुआ है वो ‘सबसे पहल...