ब्लॉगसेतु

anup sethi
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विष्णु खरे जी की यह बातचीत चिंतनदिशा के हाल के अंक में यानी 2019 अंत में छपी है। इसकी शुरुआती रिकॉर्डिंग 2012 में रमेश राजहंस के घर पर रात के खाने पर हुई। बातचीत करने के लिए पत्रिका से जुड़े हुए लेखक थे - हृदयेश मयंक, विनोद श्रीवास्तव, रमेश राजहंस, शैलेश सिंह। रिकॉ...
कुमार मुकुल
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 निराला के एक छोर पर शमशेर दूसरे पर नागार्जुन हैं। (दैनिक पाटलीपुत्र टाइम्‍स, पटना - 1995)क्‍या कविता केंद्र में वापस आ रही है और उसका उन्‍नयन हो रहा ?उन्‍नायक से ज्‍यादा जो कविता के नायक हैं वही ऐसा कहते हैं। अशोक वाजपेयी, कमलेश्‍वर ऐसे ही नायक हैं। कव‍िता क...
कुमार मुकुल
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वरिष्‍ठ कवि ज्ञानेन्‍द्रपति से कुमार मुकुल की बातचीत - समकालीन कविता 2006मैनेजर पांडेय का मानना है कि पिछले तीस वर्षों में हिंदी साहित्‍य की भाषा जनता की भाषा से अलग हुई है। इसमें जनवाद के तत्‍व घटे हैं। इसके कारण के रूप में वे प्रयोगवाद से अकविता के दौर तक की भ...
कुमार मुकुल
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विडंबना-बोध को ऐसे यथार्थवादी ढंग से अभिव्यक्त करना कि वह रूढि़यों की मिट्टी पलीद कर दे, विष्‍णु नागर की रचनाओं की खासियत है। हिंदी में यह बात नागार्जुन के यहाँ और ज्यादा सादगी के साथ केदारनाथ अग्रवाल के यहाँ दिखती है। ऐसे में जब कवि ईश्वर से जुड़ी नई रूढि़याँ पैदा...
Bharat Tiwari
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हम सिर्फ योगियों की बात करते रहे हैं इसलिए इस किताब में मैंने.... — देवदत्त पट्टनायक आज के हिंदी दैनिक हिंदुस्तान में देवदत्त पट्टनायक की भरत एस तिवारी से हुई प्रस्तुत बातचीत का अंश प्रकाशित हुआ है.  http://epaper.livehindustan.com/epaper/hindustanci...
Bharat Tiwari
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कविता में प्रत्येक शब्द और पंक्ति पर विचार करते हैं लेकिन कहानी में नहीं। कहानी की भी उसी तरह से व्याख्या होनी चाहिए | नामवर पर विश्वनाथ - 2साभार, मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी. प्रति सहेजना चाहें तो : साहित्य अकादमी, संस्कृति भवन, वाणगंगा चौराहा, भोपाल (म.प्र.) -...
Bharat Tiwari
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रेशम के लच्छे जैसी स्वर लहरियाँ | नामवर पर विश्वनाथ - 1नामवरजी ने आलोचक के रूप में जितनी ख्याति पाई उतनी ख्याति वह कवि रूप में भी पा लेते — विश्वनाथ त्रिपाठीमध्यप्रदेश साहित्य अकादमी, भोपाल की हिंदी मासिक (अरसे से बंद) 'साक्षात्कार' का एक बार फिर जीवित होना —&...
anup sethi
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दिव्‍य हिमाचल से बातचीतहिमाचल प्रदेश के एक दैनिक दिव्‍य हिमाचल ने लिखने पढ़़ने वालों के साथ बातचीत की एक श्रृंखला शुरू की है। इसमें मेरी बातचीत 18 अगस्‍त 2018 को प्रकाशित हुई थी जो यहां दी जा रही है। दिव्‍य हिमाचल : अपने भीतर के विद्रोह का संवाद अगर कविता है,...
parasmani agrawal konch
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हास्य के लिए प्रख्यात और अपने अभिनय के बलबूत&#237...
 पोस्ट लेवल : बातचीत
Lokendra Singh
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- लोकेन्द्र सिंहसामाजिक कार्यकर्ता एवं सेवानिवृत्त शिक्षक श्री सुरेश चित्रांशी के हाथों में पुस्तक "हम असहिष्णु लोग"आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय है। आपातकाल के दौरान नागरिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता का हनन ही नहीं किया गया, अपितु वैचारिक प्रतिद्वंदी एवं जनस...