ब्लॉगसेतु

YASHVARDHAN SRIVASTAV
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सूरज दुबका मुझसेडर कर!बादलों से निकला यूं छिप छिपकर!देख मुझे है मुस्कराता,फिर न जाने क्यों छिप जाता?ये मेरी समझ में ना आता!!कि ठंड हैक्या आज कुछ ज्यादा?लगता है! आज बीमार है सूरज दादा।कि बादलों को बना अपना कंबलसो गए हैं, सूरज दादा।।या फिर ग्लोबल वार्मिंग का असर हो ग...
अनीता सैनी
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उसकी ख़ामोशी खँगालती है उसे, वो वह  नहीं है जो वह थी, उसी रात ठंडी पड़ चुकी थी देह उसकी, हुआ था उसी रात उसका एक नया जन्म, एक पल ठहर गयीं थीं साँसें उसकीं,   खुला आसमां हवा में साँसों पर प्रहार, देख चुकी थी अवाक-सी वह,&nbsp...
Kajal Kumar
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ANITA LAGURI (ANU)
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आवारा बादल,शोर मचाते,धोखेबाज   बादल,छत पर आकर,उछल-कूद करते,नखरीले बादल,पास जाकर देखूँ तो,दूर कहीं छिप जाते बादल,मनमर्ज़ी करते ,विशालकाय बादल!@अनीता लागुरी "अनु"
 पोस्ट लेवल : कविता आवारा बादल
ANITA LAGURI (ANU)
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मेरी डायरियों के पन्नों में,रिक्तता शेष नहीं अब,हर सू  तेरी बातों कासहरा है..!कहाँ  डालूं इन शब्दों की पाबंदियाँ हर पन्ने में अक्स तुम्हारागहरा है...!वो टुकड़ा बादल का,वो नन्हीं-सी धूप सुनहरी,वो आँगन  गीला-सा,हर अल्फ़ाज़ यहां प...
ANITA LAGURI (ANU)
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अधखुली खिड़की से,धुएं के बादल निकल आए,संग साथ में  सोंधी रोटी कीख़ुशबू भी ले आए,                            सुलगती अंगीठी और अम्मा का धुआँ-धुआँ  होता मन..!कभी फुकनी की फूं...
ANITA LAGURI (ANU)
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एक शोर ह्रदय को झंकृत करता,मौन-मौन मनुहार ........रचाता। एक  दिया  मुंडेर  पर  जलता ,नज़्म-नज़्म  संगीत  बजाता। एक इंतज़ार टिक-टिक सुनाता,देख के तुमको नंगे पैर धूल लगाता। एक बादल कभी  ज़रा-सा  गुस्साता,हथ...
sanjiv verma salil
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​समस्यापूर्ति 'बादलों की कूचियों पर'*बादलों की कूचियों पर गीत रचो पंछियों पर भूमि बीज जड़ पींड़ परछंद कहो डालियों परझूम रही टहनियों परनाच रही पत्तियों परमंत्रमुग्ध कलियों परक्यारियों-मालियों परगीत रचो बिजलियों परबादलों की कूचियों परगीत रचो पंछियों पर*श...
 पोस्ट लेवल : geet गीत badal बादल
ANITA LAGURI (ANU)
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मेरी डायरियों के पन्नों में,रिक्तता शेष नहीं अब,हर शुं तेरी बातों कासहरा है..!कहाँ  डालूं इन शब्दों की पाबंदियाँ हर पन्ने में अक्स तुम्हारागहरा है...!वो टुकड़ा बादल का,वो नन्हीं-सी धूप सुनहरी,वो आँगन  गीला-सा,हर अल्फ़ाज़ यहां पीले हैं।तलाशती फिर रही हूँ ..श...
मुकेश कुमार
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'पापा' तो होते है 'आसमान'एक बेहद संजीदा अभिव्यक्तिकहती है ये फिर अंतिम बार उनसे मिलनेसमय के कमी की वजह सेकर रहा था हवाई यात्राबेहद ऊंचाई पर था शायदपड़ रहा था दिखाईविंडो के पार दूर तलकफटा पड़ा था आसमानबिखड़े थे बादलों के ढेर इधर-उधरपापा दम तोड़ चुके थे।तेज गति से भ...