ब्लॉगसेतु

सुशील बाकलीवाल
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             इस दुनिया में हमारा आना अपने माता-पिता के कारण होता है और उनसे जुडे अन्य दूसरे रिश्ते स्वतः हमारे साथ भी जुड जाते हैं, वे हमें अच्छे लगें या नहीं ये अलग बात है किंतु हमें उन्हें अनिवार्य रुप से जीवन भर...
Sanjay  Grover
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(पिछला हिस्सा)मंदिर में बलात्कार हुआ, इसमें हैरानी की क्या बात है !?गाना नहीं सुना आपने-ःभगवान के घर देर है अंधेर नहीं है.....’और कहावत-‘भगवान जो भी करता है अच्छा ही करता है......’एक और कहावत-‘जैसी भगवान की मर्ज़ी’मानता हूं तो लगता है कि कहावतें बुद्धिमानों ने बनाईं...
Sanjay  Grover
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(पिछला हिस्सा)आप चीज़ों को जब दूसरी या नई दृष्टि से देखते हैं तो कई बार पूरे के पूरे अर्थ बदले दिखाई देते हैं। बारात जब लड़कीवालों के द्वार पर पहुंचती थी तभी मुझे एक उदासी या अपराधबोध महसूस होने लगता था। गुलाबी पगड़ियों में पीले चेहरे लिए बारात के स्वागत लिए तैयार लोग...
Sanjay  Grover
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नाचने का मुझे शौक था। लेकिन शर्मीला बहुत था। कमरा बंद करके या ज़्यादा से ज़्यादा घरवालों के सामने नाच लेता था। उस वक़्त नाचने के लिए ज़्यादा मंच थे भी नहीं सो बारात एक अच्छा माध्यम था, समझिए कि बस खुला मंच था। एक किसी शादी का इनवीटेशन कार्ड आ जाए तो समझिए कि आपके ल...
Bhavna  Pathak
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                         मित्रो, देश में भले ही संकट हो। किसान आत्महत्या कर रहे हों, नौजवान पढ़ लिख कर, परीक्षा पर परीक्षा देकर रोजगार की आस लगाए मारे मारे फिर रहे हों, महंगाई की मार से गृहणियां बिलबि...
रवीन्द्र  सिंह  यादव
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चलो अब चाँद से मिलने छत पर चाँदनी शरमा रही है ख़्वाबों के सुंदर नगर में रात पूनम की बारात यादों की ला रही है। चाँद की ज़ेबाई सुकूं-ए-दिल लाई रंग-रूप बदलकर आ गयी बैरन तन्हाई रूठने-मनाने पलकों की गली से एक शोख़ नज़र धीर-धीरे आ रही...
Bhavna  Pathak
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हुई सुबह अब रात गईसपनों की बारात गईसमय सरकता जाता हैलौटे ना जो घड़ी गई दिन सप्ताह महीने भीसाल बीतते कितने हीओर छोर  पा सका नहींसमय का अब तक कोई भीसमय को जिसने पहचानाकदम मिला चलना जानावही बढ़ा है जिसने भीसमय बड़ा सबसे माना----------  शिवशंकर
 पोस्ट लेवल : ओरछोर सप्ताह बारात
PRABHAT KUMAR
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जब घर में शादी थी और बैंड बाजे के साथ दूल्हा चल रहा था, तो उसके दादा जी कमरे में बंद होकर पानी पीने को तरस रहे थे। घर के किवाड़ बंद थे बस एक कमरा खुला था, जिसमे दादाजी का एक फटा तौलिया बिछा हुआ था। न टाटपट्टी थी न ही कोई खाट। बस बिखरा बिखरा सा था पूरा सामान। उदासी थ...
Saliha Mansoori
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***********************शबे बारात के फजायिल व आमाल *******************शबे बारात में बन्दों पर रहमते इलाही का वे पायां नुजूल होता है. यानी शाबान की 15 वीं रात में लोगों पर इल्तिफाते ख़ुदा बंदी की बेपनाह बारिश होती है . आज की रात यानी शाबान की 15 वीं शब अल्लाह तआला दु...
 पोस्ट लेवल : शबे बारात
ललित शर्मा
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