ब्लॉगसेतु

jaikrishnarai tushar
237
एक गीत -अब बारूदी गन्ध न महके अब बारूदी गन्ध न महके खुलकर हँसे चिनार |हवा डोगरी में लिख जाये इलू -इलू या प्यार |जलपरियाँ लहरों से खेलें गयीं जो कोसों-मील ,फिर कल्हण की राजतारंगिणी गायेगी डल झील ,नर्म उँगलियाँ छेड़ें...
Kajal Kumar
16
केवल राम
314
गत अंक से आगे...हम अपने आसपास की चीजों को जब समझने की कोशिश करते हैं तो हमें समझ आता है कि इस समाज में कितना कुछ है जिसका हमारी जिन्दगी से कोई सीधा सरोकार नहीं है, और कितना कुछ ऐसा है जिसे हमें अपनाने की जरुरत है. अमूमन तो ऐसा होता है कि हम अपने सामाजिक परिवेश में...
मुकेश कुमार
212
बीडी पटाखे के लड़ियों कीकुछ क्षण की चिंगारी जैसातुम्हारा प्यारफिस्स्स्सस !!इस्स्स्ससकी हल्की छिटकती ध्वनिजैसे कहा गया हो - लव यूजिसकी प्रतिध्वनि के रूप मेंछिटक कर बनायी गयी दूरीजैसे होने वाली हो आवाज वफैलने वाली हो आगऔर उसके बाद का डर- 'लोग क्या कहेंगे'शुरूआती आवाज...