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रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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1: तितली रानीबरसात के आते हीदिख पड़ती है तितली रानीबरसात खत्म होते हीलौट जाती है अपने देश कोहरेक रंग की होती हैहर किसी को भाँति हैनीले आसमान की शोभा बनकरबच्चों को महकाती हैफूलो से रस लेकरअपना भूख मिटाती हैसब तितलियों में लाल तितली हीतितली रानी कहलाती है ।2 : परीपरिय...
रविशंकर श्रीवास्तव
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स्कूल मजेदार हैएक शहर था। जहां दो भाई रहते थे। छोटा जितना नटखट था , बडा उतना ही शांत। छोटा स्कूल जाने के समय हमेशा बहाना करता था। हमेशा देर तक सोता रहता था और स्कूल के लिए लेट हो जाता था। और उसे स्कूल में रोज डांट पड़ती थी , क्योंकि वह अपना गृहकार्य कभी भी नहीं कर...
रविशंकर श्रीवास्तव
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चुपके से आ जाती धूपरोज सबेरे मेरे घर मेंचुपके से आ जाती धूपकंप-कंपी छुटा जाड़ा भगातीसुन्दर और सुहानी धूपचहुं ओर प्रकाश फैलातीप्रकृति का अनोखा रूपहमें सुहाती सबको भातीजब आती चुपके से धूपचिड़ियां चूंचूं कर जगातींछत पर है खिल जाती धूपहर घर और आंगन मेंचुपके से आ जाती धूप...
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रविशंकर श्रीवास्तव
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