ब्लॉगसेतु

Shachinder Arya
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कभी होता, उसके खर्राटों से वह ख़ुद जग जाता। जग जाता के साथ लेटे सब न जग जाएँ। सबके सोते रहने पर वह उठता। उठकर बैठ जाता। बैठना, थोड़ी रौशनी के साथ होता। रात उस खयाल में ख़ुद को अकेले कर लेने के बाद खुदसे कहीं चले जाने लायक न बचता, तो ख़ूब रोता। आँसू नहीं आते। याद आती। य...
Shachinder Arya
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कमरे में सिर्फ़ कमरा था। वह न खाली था। न भरा था। वह कुछ-कुछ खाली था, कुछ-कुछ भरा था। इस कुछ खाली, कुछ भरे कमरे में वह बालदार लड़का, कुछ कम ख़ूबसूरत लड़की के पास बैठा रहा। वह कुछ कमसूरत लड़की बालदार लड़के के पास बैठी रही। लड़के ने चुपके से अपने मन से कहा। तुम इतनी भी ख़ूबसू...