ब्लॉगसेतु

रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : बाल कथा बालगीत बालकथा
रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : बाल कथा बालगीत बालकथा
रविशंकर श्रीवास्तव
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रविशंकर श्रीवास्तव
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 पोस्ट लेवल : बाल कथा बालकथा
Dr. Mohd. Arshad Khan
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मियाँ मुनक्का रोज़ की तरह हकीम किशमिश के दवाख़ाने पहुँचे तो वह बेचैनी से टहलक़दमी कर रहे थे। मियाँ मुनक्का को देखते ही लपककर आए और दोनों कंधे थामते हुए बोले, ‘‘आ गए दोस्त! मैं बड़ी देर से तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था।’’मियाँ मुनक्का हैरान रह गए। और दिनों में जब वह चाय...
रविशंकर श्रीवास्तव
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Dr. Mohd. Arshad Khan
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एक बार मशहूर लेखक मूरखमल ‘अज्ञानी’ ने एक किताब लिखने की सोची, जिसमें दुनिया भर के मूर्खों के क़िस्से हों। वह बहुत दिनों से चाह रहे थे कि अपनी बिरादरीवालों के लिए कुछ ऐसा कर जाएँ, जिससे ज़माना याद करे। उन्होंने किताब का नाम भी सोच रखा था-‘मूर्खों की महागाथा’। दुनिया भ...
Dr. Mohd. Arshad Khan
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सहन में पैर रखते ही मियाँ मुनक्का को जैसे चक्कर आ गया। अभी-अभी तिपाई पर चार मोटी-ताज़ी मूलियाँ रखी थीं। पर अब सिवा डंठलों के वहाँ कुछ भी नहीं दिख रहा था। उस पर तुर्रा यह कि पास में पहलवान पिस्ता का बकरा बेफिक्री से जुगाली किए जा रहा था।मियाँ मुनक्का का दिल बैठ गया।...