ब्लॉगसेतु

कुमार मुकुल
219
रवि और मोहन दो दोस्त थे । वे फैंटम और शक्तिमान आदि की रामांचक चित्रकथाओं को देखना पसंद करते थे। धीरे-धीरे वे खुद कुछ रोमांचक कर गुजरने की सोचने लगे। वे जिस हॉस्टल में रहकर पढ़ते थे वह एक पहाड़ी पर स्थित था। उसके पास ही एक घाटी थी जिसमें हाथियों का झुुंड निवास करता...
 पोस्ट लेवल : बाल कथा
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
 पोस्ट लेवल : बाल कथा बालकथा
राजीव सिन्हा
139
कवि सर्वेश्वर दयाल सक्सेना से परिचय बहुत बाद में हुआ। परिचय हो जाने पर भी उनकी पहली याद अपनी प्रिय पत्रिका पराग के संपादक के रूप में ही रही। आज उनकी पुण्य तिथि पर प्रस्तुत है, बच्चों के लिए लिखी गई उनकी एक गीत कथा  एक लड़की थी। वह हमेशा धूल में खेलती थी। नतीजा यह हु...
 पोस्ट लेवल : बाल कथाएँ
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
 पोस्ट लेवल : बाल कथा बालगीत बालकथा
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
 पोस्ट लेवल : बाल कथा बालगीत बालकथा
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
 पोस्ट लेवल : बाल कथा बालगीत बालकथा
रविशंकर श्रीवास्तव
5
..............................
 पोस्ट लेवल : बाल कथा बालकथा
Dr. Mohd. Arshad Khan
658
मियाँ मुनक्का रोज़ की तरह हकीम किशमिश के दवाख़ाने पहुँचे तो वह बेचैनी से टहलक़दमी कर रहे थे। मियाँ मुनक्का को देखते ही लपककर आए और दोनों कंधे थामते हुए बोले, ‘‘आ गए दोस्त! मैं बड़ी देर से तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था।’’मियाँ मुनक्का हैरान रह गए। और दिनों में जब वह चाय...