ब्लॉगसेतु

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 इतनी जल्दी क्या है बिटिया, सिर पर पल्लू लाने की।अभी उम्र है गुड्डे-गुड़ियों के संग,समय बिताने की।।मम्मी-पापा तुम्हें देख कर,मन ही मन हर्षाते हैं।जब वो नन्ही सी बेटी की,छवि आखों में पाते है।।जब आयेगा समय सुहाना, देंगे हम उपहार तुम्हें।तन मन धन से सब स...
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गुड़ियामाँ लाई है प्यारी गुड़िया उसको  वस्त्र पहनाऊंगी हरे रंग का लहगाँ होगा चूनर लाल ओढाउँगी खाना खाने बैठूंगी जबउसके हाथ धुलाउँगी रूठेगी जब  प्यारी गुड़िया उसको सदा मनाऊंगी परेशान गर्मी से होगीतब उसको नहलाऊंगी&nbs...
sanjiv verma salil
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बाल कविता :तुहिना-दादीसंजीव 'सलिल'*तुहिना नन्हीं खेल कूदती.खुशियाँ रोज लुटाती है.मुस्काये तो फूल बरसते-सबके मन को भाती है.बात करे जब भी तुतलाकरबोले कोयल सी बोली.ठुमक-ठुमक चलती सब रीझेंबाल परी कितनी भोली.दादी खों-खों करतीं, रोकें-टोंकें सबको : 'जल्द उठो.हुआ सवेरा अब...
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 खुशी चलो आज  मिलकर खेलेंगे खेल को खेल के जैसे खुशी  ये मिल नहीं सकती लूटा कर जेब के पैसेआपस में मिलजुलकरकरना बच्चों सारे खेलतकरार...
sanjiv verma salil
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: बाल कविता :संजीव 'सलिल'*आन्या गुडिया प्यारी,सब बच्चों से न्यारी।.गुड्डा जो मन भाया,उससे हाथ मिलाया।.हटा दिया मम्मी ने,तब दिल था भर आया।.आन्या रोई-मचली,मम्मी थी कुछ पिघली।.''नया खिलौना ले लो'',आन्या को समझाया।.शाम को पापा आएमम्मी पर झल्लाए।*हुई रुआँसी मम्मीआन्या न...
 पोस्ट लेवल : बाल कविता
राजीव सिन्हा
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फिर क्या होगा उसके बाद? उत्सुक होकर शिशु ने पूछा, “माँ, क्या होगा उसके बाद?” रवि से उज्जवल, शशि से सुंदर, नव-किसलय दल से कोमलतर। वधू तुम्हारी घर आएगी उस विवाह-उत्सव के बाद।’ पलभर मुख पर स्मित-रेखा, खेल गई, फिर माँ ने देखा । उत्सुक हो कह उठा, किन्त...
 पोस्ट लेवल : बाल कविताएँ
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 रोज सवेरे मैं उठ जाता।कुकड़ूकूँ की बाँग लगाता।।कहता भोर हुई उठ जाओ।सोने में मत समय गँवाओ।।आलस छोड़ो, बिस्तर त्यागो।मैं भी जागा, तुम भी जागो।।पहले दिनचर्या निपटाओ।फिर पढ़ने में ध्यान लगाओ।।अगर सफलता को है पाना।सेवा-भाव सदा अपनाना।।मुर्गा हूँ मैं सिर्फ नाम का।स...
sanjiv verma salil
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बाल कविताएँकल्पना भट्ट*१. भोर*भोर हो गयी जागो प्यारेचले गए हैं चाँद-सितारे।भोर हुई है आई चिड़ियाआँख खुली मत लाओ निंदिया ।आओ! करें सूर्य का स्वागतसुभ सुनहरा है अब आगत ।गोरैया आ गीत सुनाओआशाओं के  दीप जलाओ ।*२. हम बालकहम बालक छोटे अज्ञानीक्यों करे कोई छल बताओ?हमक...
ऋता शेखर 'मधु'
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बाल-गीतमौसम गर्मी का है आयासूरज छतरी से शरमायागुलमोहर की लाली देखोउसमें तुम खुशहाली देखोतरबूजों की शान निरालीशर्बत बनकर भरती प्यालीपीले पीले आम सुहानेठेलों पर आ गए रिझानेहुई गुलाबी लीची रानीपेटी में भर लाई नानीछुट्टी में तुम पढ़ो कहानीपीकर मीठा नरियल पानीबच्चों मन क...
 पोस्ट लेवल : बाल कविता
sahitya shilpi
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