ब्लॉगसेतु

sahitya shilpi
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आज हमारे लिए बड़े सौभाग्य की बात है की हमें हर साल 26 जनवरी को गणतन्त्र  दिवस मनाने का मौका मिलता है| हर साल की तरह इस साल भी सभी को इस दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाए व इस दिवस पर पेश है मेरे नई बाल कविता "मेरे सपनों का भारत "    मेरे सपनों...
sahitya shilpi
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sahitya shilpi
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आज “चैतन्य का कोना” ब्लॉग परअचानक ही डॉ. मोनिका शर्मा कीइस पोस्ट पर भी नजर पड़ी। ब्लॉगिंग से जुड़े सभी लोगरूपचंद्र शास्त्री 'मयंक' जी कीबाल कवितायेँ पढ़ ही चुके हैं ।मुझे भी उनकी बाल कवितायेँ बहुत पसंद हैं । आज चैतन्य की हिन्दी...
sahitya shilpi
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sanjiv verma salil
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बाल कविता: मेरे पिता संजीव 'सलिल'जब तक पिता रहे बन साया!मैं निश्चिन्त सदा मुस्काया!*रोता देख उठा दुलराया कंधे पर ले जगत दिखाया उँगली थमा,कहा: 'बढ़ बेटा!बिना चले कब पथ मिल पाया?' *गिरा- उठाकर मन बहलाया 'फिर दौड़ो'उत्साह बढ़ायाबाँह झुला भय...
sahitya shilpi
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sanjiv verma salil
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बाल कविता: कोयल-बुलबुल की बातचीत -संजीव 'सलिल'*कुहुक-कुहुक कोयल कहे: 'बोलो मीठे बोल'.चहक-चहक बुलबुल कहे: 'बोल न, पहले तोल'..यह बोली: 'प्रिय सत्य कह, कड़वी बात न बोल'.वह बोली: 'जो बोलना उसमें मिसरी घोल'.इसका मत: 'रख बात में कभी न अपनी झोल'.उसका मत: 'निज गुणों का कभ...
 पोस्ट लेवल : कोयल बुलबुल बाल कविता
sanjiv verma salil
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बाल कविता :तुहिना-दादीसंजीव 'सलिल'*तुहिना नन्हीं खेल कूदती.खुशियाँ रोज लुटाती है.मुस्काये तो फूल बरसते-सबके मन को भाती है.बात करे जब भी तुतलाकरबोले कोयल सी बोली.ठुमक-ठुमक चलती सब रीझेंबाल परी कितनी भोली.दादी खों-खों करतीं, रोकें-टोंकें सबको : 'जल्द उठो.हुआ सवेरा अब...
sanjiv verma salil
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पेंसिलपेन्सिल बच्चों को भाती है.काम कई उनके आती है.अक्षर-मोती से लिखवाती.नित्य ज्ञान की बात बताती.रंग-बिरंगी, पतली-मोटी.लम्बी-ठिगनी, ऊँची-छोटी.लिखती कविता, गणित करे.हँस भाषा-भूगोल पढ़े.चित्र बनाती बेहद सुंदर.पाती है शाबासी अक्सर.बहिना इसकी नर्म रबर.मिटा-सुधारे गलती...
 पोस्ट लेवल : बाल कविता पेंसिल