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sanjiv verma salil
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बाल कविता आन्या आन्या मचल गयी थी, मन में जिद थी ठाने।मना-मना सब हारे, बात न लेकिन माने। लगी बहाने आँसू, सिर पर गगन उठाया।मम्मी-पापा भैया, कोइ मना न पाया।आये नानी-नाना, बहुतेरा समझाया।आया को खुश करने, गुड्डा एक मँगाया।आन्या झूमी-नाची, ज...
 पोस्ट लेवल : बाल कविता आन्या
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--लगा हुआ ठेले पर ढेर।गली-गली में बिकते बेर।।--रहते हैं ये काँटों के संग।मनमोहक हैं बेरों के रंग।।--जो हरियल हैं, वे कच्चे हैं।जो पीले हैं, वे पक्के हैं।।--ये सबके मन को ललचाते।हम बच्चों को बहुत लुभाते।।--शंकर जी को भोग लगाओ।व्रत में तुम बेरों को खाओ।।-- ...
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--तीन रंग का झण्डा न्यारा।हमको है प्राणों से प्यारा।।--त्याग और बलिदानों का वर।रंग केसरिया सबसे ऊपर।।--इसके बाद श्वेत रंग आता।हमें शान्ति का ढंग सुहाता।।--सबसे नीचे रंग हरा है।हरी-भरी यह वसुन्धरा है।।--बीचों-बीच चक्र है सुन्दर।हो विकास भारत के अन्दर।।--गाओ कौम...
Kavita Rawat
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A B C Dआया नया वर्ष 2020 जीE F G Hसदा बोलना सच-सचI J K Lआगे-आगे बढ़ता चलM N O Pकभी न देखना मुड़कर जीQ R S Tघिसट-घिसट मत चलना जीU V W Xकभी न बनाना जेरॉक्सY Zचलता रहे सबका नेटHappy New Year 2020 ...अर्जित रावत
नई कलम
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चूहे की घड़ी ==========टिक टिक टिक कौन चूहा बैठा है मौन बिल्ली से नाराज़ है शैतानी से बाज़ है खाना भी ना खाया है मनाए उसे कौन...घड़ी चुरायी बिल्ली ने खरीदी थी जो दिल्ली में बिल्ली से ये डरता है गली में बनता डॉन...टिक...
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 इतनी जल्दी क्या है बिटिया, सिर पर पल्लू लाने की।अभी उम्र है गुड्डे-गुड़ियों के संग,समय बिताने की।।मम्मी-पापा तुम्हें देख कर,मन ही मन हर्षाते हैं।जब वो नन्ही सी बेटी की,छवि आखों में पाते है।।जब आयेगा समय सुहाना, देंगे हम उपहार तुम्हें।तन मन धन से सब स...
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गुड़ियामाँ लाई है प्यारी गुड़िया उसको  वस्त्र पहनाऊंगी हरे रंग का लहगाँ होगा चूनर लाल ओढाउँगी खाना खाने बैठूंगी जबउसके हाथ धुलाउँगी रूठेगी जब  प्यारी गुड़िया उसको सदा मनाऊंगी परेशान गर्मी से होगीतब उसको नहलाऊंगी&nbs...
sanjiv verma salil
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बाल कविता :तुहिना-दादीसंजीव 'सलिल'*तुहिना नन्हीं खेल कूदती.खुशियाँ रोज लुटाती है.मुस्काये तो फूल बरसते-सबके मन को भाती है.बात करे जब भी तुतलाकरबोले कोयल सी बोली.ठुमक-ठुमक चलती सब रीझेंबाल परी कितनी भोली.दादी खों-खों करतीं, रोकें-टोंकें सबको : 'जल्द उठो.हुआ सवेरा अब...
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 खुशी चलो आज  मिलकर खेलेंगे खेल को खेल के जैसे खुशी  ये मिल नहीं सकती लूटा कर जेब के पैसेआपस में मिलजुलकरकरना बच्चों सारे खेलतकरार...
sanjiv verma salil
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: बाल कविता :संजीव 'सलिल'*आन्या गुडिया प्यारी,सब बच्चों से न्यारी।.गुड्डा जो मन भाया,उससे हाथ मिलाया।.हटा दिया मम्मी ने,तब दिल था भर आया।.आन्या रोई-मचली,मम्मी थी कुछ पिघली।.''नया खिलौना ले लो'',आन्या को समझाया।.शाम को पापा आएमम्मी पर झल्लाए।*हुई रुआँसी मम्मीआन्या न...
 पोस्ट लेवल : बाल कविता