ब्लॉगसेतु

Dr. Mohd. Arshad Khan
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...और रूनू रो पड़ी।  इतना रोई कि उसके आँसू गिरकर कमरे में फैलने लगे। हर ओर पानी ही पानी हो गया। पहले तो पानी दरवाज़े की दराज़ों से भागा। पर पतली-सी दराज़ से पानी कहाँ तक निकल पाता? जल्दी ही कमरा लबालब हो गया और पानी खिड़कियों से झरने की तरह गिरने लगा। दरवाज़े द...
Kavita Rawat
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“अप्रैल की सुहानी सुबह फूलों की खुशबू और आकाश में चमकते सूरज के साथ सभी प्यारे पोकेमाॅन हो, तब बच्चों के अपने नए पोकेमाॅन को चुनने के लिए यह एक आनंददायक आदर्श दिन है।“ गोस्वामी जी ने आराम की थाह लेते हुए कहा। “आप सही कह रहे हैं, मिस्टर पीयूष! आखिरकार एक लम्बे...
Kavita Rawat
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Pokemon Chakra Story Chapter-1 The remainder of the story......Pokemon Chakra Story Chapter-1 The remainder of the story......Pranali was walking through the Swamp area. There she met the girl, whom Sam referred as Naggin but literally, Prabhav gave...
Kavita Rawat
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हम तो ठहरे हिन्दी माध्यम से पढ़े-लिखे, इसलिए हिंदी में ही पढ़ते-लिखते हैं। अंग्रेजी तो अपनी बस काम चलताऊ है, थोड़ा-बहुत समझ आ जाता है। अपने लिए तो  इतना  ही काफी है।  लेकिन अब मेरे आठवीं कक्षा में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाले बेटे को भी गीत-संगीत, चित्र...
Dr. Mohd. Arshad Khan
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पीपल का एक पेड़ था। ख़ूब घनेरा। उसकी लंबी और मोटी शाखाएँ दूर तक फैली हुई थीं।पतझर का मौसम आया तो उसके पत्ते पीले होकर झड़ने लगे। पत्तों से भरी घनी डालें तिनकों का जाल होकर रह गईं।सबसे ऊँची डाली पर बचा एक पत्ता टूटकर गिरने से डर रहा था। जब हवा का झोंका आता तो वह थर-थर...
Dr. Mohd. Arshad Khan
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‘‘भैया, मौलवी साहब आ रहे हैं..’’ असद छज्जे से झाँकता हुआ चिल्लाया।हमदान मोबाइल पर गेम खेलने में मगन था। असद की आवाज़ ने रंग में भंग कर दिया, पर उसने अपनी निगाह मोबाइल पर गड़ाए रखी।‘‘भैया...मौलवी साहब आ गए हैं...!!’’ असद ने एक-एक शब्द पर ज़ोर देकर दोबारा कहा।‘‘आ गए...
 पोस्ट लेवल : बाल कहानी कहानी
Dr. Mohd. Arshad Khan
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मियाँ मुनक्का रोज़ की तरह हकीम किशमिश के दवाख़ाने पहुँचे तो वह बेचैनी से टहलक़दमी कर रहे थे। मियाँ मुनक्का को देखते ही लपककर आए और दोनों कंधे थामते हुए बोले, ‘‘आ गए दोस्त! मैं बड़ी देर से तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था।’’मियाँ मुनक्का हैरान रह गए। और दिनों में जब वह चाय...
Dr. Mohd. Arshad Khan
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एक बार मशहूर लेखक मूरखमल ‘अज्ञानी’ ने एक किताब लिखने की सोची, जिसमें दुनिया भर के मूर्खों के क़िस्से हों। वह बहुत दिनों से चाह रहे थे कि अपनी बिरादरीवालों के लिए कुछ ऐसा कर जाएँ, जिससे ज़माना याद करे। उन्होंने किताब का नाम भी सोच रखा था-‘मूर्खों की महागाथा’। दुनिया भ...
Dr. Mohd. Arshad Khan
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सहन में पैर रखते ही मियाँ मुनक्का को जैसे चक्कर आ गया। अभी-अभी तिपाई पर चार मोटी-ताज़ी मूलियाँ रखी थीं। पर अब सिवा डंठलों के वहाँ कुछ भी नहीं दिख रहा था। उस पर तुर्रा यह कि पास में पहलवान पिस्ता का बकरा बेफिक्री से जुगाली किए जा रहा था।मियाँ मुनक्का का दिल बैठ गया।...
Dr. Mohd. Arshad Khan
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राघव बाबा बरामदे में लेटे उचाट भाव से दूर खेतों में हवा की अटखेलियाँ देख रहे थे। बाहर सारी प्रकृति जैसे अद्भुत उल्लास में डूबी हुई थी। सरसों के खेतों में फैली पीली चादर फरवाई से डोल-डोल जाती थी। गेहूँ और जौ के खेतों से गुज़रती हवा खनखनाकर हँस पड़ती थी। सूरज की सुनहरी...
 पोस्ट लेवल : बाल कहानी बसंत पंचमी