ब्लॉगसेतु

Basudeo Agarwal
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बहर 1222 1222 1222 1222नया आया है संवत्सर, करें स्वागत सभी मिल के;नये सपने नये अवसर, नया ये वर्ष लाया है।करें सम्मान इसका हम, नई आशा बसा मन में;नई उम्मीद ले कर के, नया ये साल आया है।लगी संवत् सत्ततर की, चलाया उसको नृप विक्रम;सुहाना शुक्ल पखवाड़ा, महीना चैत्र तिथि एक...
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दोस्तो दिल का सदर घर का सदर होने को है,बा-बहर जो थी ग़ज़ल वह बे-बहर होने को है,हम मुहब्बत के असर में खूब पागल थे रहे,जिंदगी की असलियत का अब असर होने को है।(2122×3  212)*********उल्टे सीधे शब्द जोड़ कर, कुछ का कुछ लिख लेता हूँ,अंधों में काना राजा हूँ, मन मर्जी का...
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शक्ति कलम की मत कम आँको, तख्त पलट ये देती है,क्रांति-ज्वाल इसकी समाज को, अपने में भर लेती है,मात्र खिलौना कलम न समझें, स्याही को छिटकाने का,लिखी इबारत इसकी मन में, नाव भाव की खेती है।(ताटंक छंद)*********कलम सुनाओ लिख कर ऐसा, और और सब लोग कहें,बार बार पढ़ कर के जिसको...
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(करवाचौथ)त्योहार करवाचौथ का नारी का है प्यारा बड़ा,इक चाँद दूजे चाँद को है देखने छत पे खड़ा,लम्बी उमर इक चाँद माँगे वास्ते उस चाँद के,जो चाँद उसकी जिंदगी के आसमाँ में है जड़ा।(2212*4)*********(होली)हर तरु में छाया बसन्त ज्यों, जीवन में नित रहे बहार,होली के रंगों की जै...
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आओ करें प्रण और अब आतंक को सहना नहीं,अब मौन ज्यादा और हम सब को कभी रहना नहीं,आतंक में डर डर के जीना भी भला क्या ज़िंदगी,अब कर दिखाना कुछ हमें बस सिर्फ कुछ कहना नहीं।(2212×4)*********किस अभागी शाख का लो एक पत्ता झर गया फिर,आसमां से एक तारा टूट कर के है गिरा फिर,सरहदो...
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नणँदल नखराँली, नणदोई म्हारो बोळो छेड़ै है,बस में राखो री।।टेर।।सोलह सिंगाराँ रो रसियो, यो मारूड़ो थारो है,बणी ठणी रह घणी धणी नै, रोज रिझाओ री,नणँदल नखराँली।।काजू दाखाँ अखरोटां रो, नणदोई शौकीन घणो,भर भर मुट्ठा मुंडा में दे, खूब खिलाओ री,नणँदल नखराँली।।नारैलाँ री चटणी...
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फागुन का मास।रसिकों की आस।।बासंती वास।लगती है खास।।होली का रंग।बाजै मृदु चंग।।घुटती है भंग।यारों का संग।।त्यज मन का मैल।टोली के गैल।।होली लो खेल।ये सुख की बेल।।पावन त्योहार।रंगों की धार।।सुख की बौछार।दे खुशी अपार।।=============निधि छंद विधान:-यह नौ मात्रिक चार चरणो...
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होली के सब पे चढ़े, मधुर सुहाने रंग।पिचकारी चलती कहीं, बाजे कहीं मृदंग।।दहके झूम पलाश सब, रतनारे हो आज।मानो खेलन रंग को, आया है ऋतुराज।।होली के रस की बही, सरस धरा पे धार।ऊँच नीच सब भूल कर, करें परस्पर प्यार।।फागुन की सब पे चढ़ी, मस्ती अपरम्पार।बाल वृद्ध सब झूम के, रस...
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सभी हम दीन।निहायत हीन।।हुए असहाय।नहीं कुछ भाय।।गरीब अमीर।नदी द्वय तीर।।न आपस प्रीत।यही जग रीत।।नहीं सरकार।रही भरतार।।अतीव हताश।दिखे न प्रकाश।।झुकाय निगाह।भरें बस आह।।सहें सब मौन।सुने वह कौन।।सभी दिलदार।हरें कुछ भार।।कृपा कर आज।दिला कछु काज।।मिला कर हाथ।चलें सब साथ।...
Basudeo Agarwal
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चले चलो पथिक।बिना थके रथिक।।थमे नहीं चरण।भले हुवे मरण।।सुहावना सफर।लुभावनी डगर।।बढ़ा मिलाप चल।सदैव हो अटल।।रहो सदा सजग।उठा विचार पग।।तुझे लगे न डर।रहो न मौन धर।।प्रसस्त है गगन।उड़ो महान बन।।समृद्ध हो वतन।रखो यही लगन।।=============लक्षण छंद:-"जभाग" वर्ण धर।सु'शारदी' म...