ब्लॉगसेतु

Basudeo Agarwal
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माखन श्याम चुरा नित ही, कछु खावत कछु लिपटावै।ग्वाल सखा सह धूम करे, यमुना तट गउन चरावै।।फोड़त माखन की मटकी, सब गोरस नित बिखराये।गोपिन भी लख हर्षित हैं, पर रोष बयन दिखलाये।।मात यशोमत नित्य मथे, दधि की जब लबलब झारी।मोहन आय तभी धमकै, अरु बाँह भरत महतारी।।मात बिलोवत जाय...
Basudeo Agarwal
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किशन कन्हैया, ब्रज रखवैया,        भव-भय दुख हर, घट घट वासी।ब्रज वनचारी, गउ हितकारी,        अजर अमर अज, सत अविनासी।।अतिसय मैला, अघ जब फैला,         धरत कमलमुख, तब अवतारा।यदुकुल माँही, तव परछाँही, ...
Basudeo Agarwal
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इस देश की भगत सिंह शान है।सुखदेव राजगुरु आन बान है।।हम आह आज बलिदान पे भरें।उन वीर की चरण वन्दना करें।।अति घोर कष्ट कटु जेल के सहे।चढ़ फांस-तख्त पर भी हँसे रहे।।निज प्राण देश-हित में जिन्हें दिये।उनको लगा कर सदा रखें हिये।।तिथि मार्च तेइस शहीद की मने।उनके समान जन दे...
Basudeo Agarwal
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सँभल सँभल चरण धरत, चलत जिमि मराल।बरनउँ किस विध मधुरिम, रसमय मृदु चाल।।दमकत यह तन-द्युति लख, थिर दृग रह जात।तड़क तड़ित सम चमकत, बिच मधु बरसात।।शशि-मुख छवि अति अनुपम, निरख बढ़त प्यास।यह लख सुरगण-मन मँह, जगत मिलन आस।।विरह विकल अति अब यह, कनक वरण नार।दिन निशि कटत न समत न,...
Basudeo Agarwal
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करके सफल चुनाव को,माँग रही बदलाव को,आज व्यवस्था देश की।***बहुमत बड़ा प्रचंड है,सत्ता लगे अखंड है,अब जवाबदेही बढ़ी।****रूढ़िवादिता तोड़ के,स्वार्थ लिप्तता छोड़ के,काम करे सरकार यह।***राजनीति की स्वच्छता,सभी क्षेत्र में दक्षता,निश्चित अब तो दिख रही।***आसमान को छू रहा,रग र...
Basudeo Agarwal
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जनक छंद रच के मधुर,कविगण कहते कथ्य को,वक्र-उक्तिमय तथ्य को।***तेरह मात्रिक हर चरण,ज्यों दोहे के पद विषम,तीन चरण का बस 'जनक'।****पहला अरु दूजा चरण,समतुकांतता कर वरण,'पूर्व जनक' का रूप ले।***दूजा अरु तीजा चरण,ले तुकांतमय रूप जब,'उत्तर जनक' कहाय तब।***प्रथम और तीजा चर...
Basudeo Agarwal
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करके तांडव नृत्य, प्रलय जग की शिव करते।विपदाएँ भव-ताप, भक्त जन का भी हरते।देवों के भी देव, सदा रीझें थोड़े में।करें हृदय नित वास, शैलजा सँग जोड़े में।प्रभु का निवास कैलाश में, औघड़ दानी आप हैं।भज ले मनुष्य जो आप को, कटते भव के पाप हैं।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया22...
Basudeo Agarwal
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अग्रसेन नृपराज, सूर्यवंशी अवतारी।विप्र धेनु सुर संत, सभी के थे हितकारी।द्वापर का जब अंत, धरा पर हुआ अवतरण।भागमती प्रिय मात, पिता वल्लभ के भूषण।नागवंश की माधवी, इन्हें स्वयंवर में वरी।अग्रोहा तब नव बसा, झोली माँ लक्ष्मी भरी।।बासुदेव अग्रवाल 'नमन'तिनसुकिया20-04-18
Basudeo Agarwal
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छप्पय एक अर्द्ध सममात्रिक छंद है। यह भी कुंडलिया छंद की तरह छह चरणों का एक मिश्रित छंद है जो दो छंदों के संयोग से बनता है। इसके प्रथम चार चरण रोला छंद के, जिसके प्रत्येक चरण में 24-24 मात्राएँ होती हैं तथा यति 11-13 पर होती है। आखिर के दो चरण उल्लाला छंद के होते है...
भावना  तिवारी
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मत्त सवैया मुक्तकमाला (2019 चुनाव)हर दल जो टुकड़ा टुकड़ा था, इस बार चुनावों ने छाँटा;बाहर निकाल उसको फेंका, ज्यों चुभा हुआ हो वो काँटा;जो अपनी अपनी डफली पर, बस राग स्वार्थ का गाते थे;उस भ्रष्ट तंत्र के गालों पर, जनता ने मारा कस चाँटा।इस बार विरोधी हर दल ने, ऐसा भारी...