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Basudeo Agarwal
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1222*4 (विधाता छंद आधारित)(पदांत 'तुम्हें पापा', समांत 'आऊँगा')अभी नन्हा खिलौना हूँ , बड़ा प्यारा दुलारा हूँ;उतारो गोद से ना तुम, मनाऊँगा तुम्हें पापा।।भरूँ किलकारियाँ प्यारी, करूँ अठखेलियाँ न्यारी;करूँ कुछ खाश मैं नित ही, रिझाऊँगा तुम्हें पापा।।इजाजत जो तुम्हारी हो...
Basudeo Agarwal
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हिन्दी काव्य की एक विधा जिसमें चार चार पद के 'मुक्ता' एक माला की तरह गूँथे जाते हैं। मैंने इसका नाम मौक्तिका दिया है क्योंकि इस में 'मुक्ता' शेर की तरह पिरोये जाते हैं। मौक्तिका में मुक्ताओं की संख्या कितनी होगी इसके लिए कोई निश्चित नियम नहीं है फिर भी 4 तो होने ही...
Basudeo Agarwal
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उत्तर बिराज कर, गिरिराज रखे लाज,तुंग श्रृंग रजत सा, मुकुट सजात है।तीन ओर पारावार, नहीं छोर नहीं पार,मारता हिलोर भारी, चरण धुलात है।जाग उठे तेरे भाग, गर्ज गंगा गाये राग,तेरी इस शोभा आगे, स्वर्ग भी लजात है।तुझ को 'नमन' मेरा, अमन का दूत तू है,जग का चमन हिन्द, सब को रि...