ब्लॉगसेतु

Shachinder Arya
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यह ‘जम्मू’ से ज़्यादा ‘कश्मीर’ में आई बाढ़ है। ऐसा मैं नहीं कह रहा, ऐसा टीवी चैनल दिखा रहे हैं। कई प्रबुद्धजन बीते सालों में आई बाढ़ों के ब्योरों के साथ तय्यार हैं। कोई उन्हे किसी बहस में बुला ले बस। ऐसे भी लोग हैं, जो इस आपदा काल में सेना की रचनात्मक और सकर्मक भूमिका...
Shachinder Arya
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शनिवार तीस अगस्त, शाम साढ़े छह बजने के आधे घंटे बाद, लगभग सात बजे। उधर से छोटे जन का फ़ोन आया। दादी नहीं रहीं। दिमाग ठीक रहे, तब वाक्य भी ठीक आयें। पर ख़ैर। उनके ठीक होने का कोई मतलब नहीं रह गया, जिनको ठीक होना था, वो अब चली गईं। मंगलवार उन्हे लखनऊ से वापस ले आए। डॉक्...
Shachinder Arya
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बाढ़ कैसी होती है? इसके रेणु के 'ऋणजल धनजल' जैसे कई जवाब हो सकते हैं। फ़िर इसके बाहर यह कैसी भी होती हो, पर गौरव सोलंकी के फ़ेसबुक कवर पर लगी तस्वीर और वहाँ लिखी कविता की तरह बिलकुल नहीं होती। तस्वीर धुंधली है, पर लड़की दिखाई दे रही है। बगल में झोला दबाये, एक हाथ से छ...