ब्लॉगसेतु

मुकेश कुमार
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बोनसाई पेड़ों जैसीहोती है जिंदगी, मेट्रो सिटी में रहने वालों कीमिलता है सब कुछलेकिन मिलेगा राशनिंग मेंपानीबिजलीवायुघर की दीवारेंपार्किंगयहाँ तक की धूप भीसिर्फ एक कोना छिटकता हुआहै न सचख़ास सीमा तक कर सकते हैं खर्चपानी या बिजलीअगर पाना हैसब्सिडाइज्ड कीमतवर्नाभुगतो बजट...
भावना  तिवारी
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          हेमन्त ऋतु अपने यौवन पर  है , रात्रि- समारोहों आदि में ठिठुरन से बचने के लिए  अलाव जलाए जाने  का क्रम प्रारम्भ हो चला है | प्रस्तुत है एक ठिठुरती हुई रचना .....        &n...
Ravindra Pandey
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क्यों छूट गया हाथ से, आँचल का वो कोना।दुनिया मेरी आबाद थी, जिस के तले कभी।।एक तेरा साथ होना, था सबकुछ हमारे पास।हासिल जहां ये हमको, लगता है मतलबी।।परमपिता का जाने, ये कैसा अज़ीब न्याय।जिसको उठा ले जाये, चाहे वो जब कभी।।सहमी हुई है  धड़कन,  बदहवास  है&n...
Kajal Kumar
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सुशील बाकलीवाल
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          एक अमीर आदमी अपने बेटे को लेकर गाँव गया, ये दिखाने कि गरीबी कैसी होती है । गाँव की गरीबी दिखाने के बाद उसने अपने बेटे से पूछा - "देखी गरीबी ?"           ...
Kheteswar Boravat
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जन्मेजय तिवारी
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                 यकीन नहीं था कि गली के नुक्कड़ पर पहुँचते ही मुझे नुक्कड़-नाटक के दर्शन साक्षात होने लगेंगे । सौभाग्य इतना होगा कि मुझे भी उस नुक्कड़-नाटक में शामिल कर लिया जाएगा । हुआ यह कि नुक्कड़ पर पहुँचते ही म...
शिवम् मिश्रा
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एक बार मैनपुरी दौरे के दौरान, एक छात्र ने मुलायम सिंह जी से शिकायत की : "सर जी, आप ने मैनपुरी को कटौती रहित बिजली सप्लाई के आदेश करवाए हुये हैं फिर भी बिजली नहीं आती ... हम लोगों की पढ़ाई नहीं हो पाती ... कुछ जुगाड़ हो जाती तो ..."मुलायम सिंह जी : "हम नितीश कुम...
sanjiv verma salil
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एक रचना कारे बदरा *आ रे कारे बदरा*टेर रही धरती तुझे आकर प्यास बुझा रीते कूप-नदी भरने की आकर राह सुझा ओ रे कारे बदरा *देर न कर अब तो बरस बजा-बजा तबला बिजली कहे न तू गरज नारी है सबला भा रे कारे बदरा *लह...
जन्मेजय तिवारी
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             ‘आप पत्रकार लोग भी तिल का ताड़ बनाने के उस्ताद होते हैं ।’ उन्होंने मुझे देखते ही ताना मारा ।   ‘पर आतंकवाद को आप तिल कदापि नहीं कह सकते । वह तो कब का ताड़ बन चुका है ।’ मैंने प्रतिवाद करने की कोशिश करत...