ब्लॉगसेतु

Akhilesh Karn
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फिल्म : गंगा के पारगायक : तृप्ती शक्या (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); बंसिया बजाबै छै सैंयाबंसिया बजाबै छै सैंयादिल धरकाबै ने दैयाबंसिया बजाबै छै सैंयादिल धरकाबै ने दैयाहमरा ऊ बोलाबै छैनदिया किनार ने रे कीहमरा ऊ बोलाबै छैनदिया किनार ने र...
Akhilesh Karn
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फिल्म : मैया के भवनगायक : सुनील छैला बिहारी, मीनू अरोड़ा (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); मैया के भवनमा हरदम जले जगमग ज्योति रे जानजान रे जले जगमग ज्योति रे जानजान रे बरसे मैया दुअरिया प्यार के मोती रे जानजान रे बरसे मैया दुअरिया प्यार के मो...
शिवम् मिश्रा
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सायद एही साल का बात है या लास्ट ईयर का. समय पुस्तक मेला का था, इसलिये साल चाहे जो भी हो, हम तब तक दिल्ली से निकाले नहीं गये थे. पुस्तक मेला का तमाम गहमा-गहमी के बीच मेला घूमना अऊर बहुत सा किताब खरीदना त होबे किया, एगो अलग अनुभब ई हुआ कि ब्लॉग के पुराना समय के दोस्त...
Rajeev Upadhyay
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ज़िन्दगी से बड़ी सज़ा ही नहीं, और क्या जुर्म है पता ही नहीं।इतने हिस्सों में बट गया हूँ मैं, मेरे हिस्से में कुछ बचा ही नहीं| ज़िन्दगी! मौत तेरी मंज़िल है दूसरा कोई रास्ता ही नहीं।सच घटे या बड़े तो सच न रहे, झूठ की कोई इन्तहा ही नहीं।ज़िन्द...
Brajesh Kumar Pandey
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इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें–बराबर से गया की ओर जाने के लिए मुझे हाइवे पकड़ना था। पतली सड़कों से रास्ता पूछते हुए चलने में कोई बुद्धिमानी नहीं है। तो फिर से फल्गू नदी में उड़ती धूल को पार कर खिज्रसराय पहुँचा और वहाँ से फल्गू नदी के किन...
Brajesh Kumar Pandey
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इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें–बिहार का जहानाबाद जिला। दिन के 10 बजे जब मैं बराबर पहुँचा तो धूप मेरे बराबर हो गयी थी। और अब मुझसे आगे निकलने की होड़ में थी। मुझे बराबर की पहाड़ियों पर इसी तपती धूप में ऊपर चढ़ना था तो मैं सामने आने वाली प...
Brajesh Kumar Pandey
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इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें–नालंदा से 3 बजे पावापुरी के लिए चला तो आधे घण्टे में पावापुरी के जलमंदिर पहुँच गया। नालंदा के खण्डहरों से इसकी दूरी 15 किमी है। दोनों स्थानों के बीच सीधा रास्ता नहीं है। कई सम्पर्क मार्गाें से होते हुए जाना...
Brajesh Kumar Pandey
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इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें–दिन के 11 बज चुके थे। राजगीर के बस स्टैण्ड चौराहे पर 30 रूपये वाला ʺमेवाड़ प्रेम मिल्क शेकʺ पीकर मैं नालन्दा की ओर चल पड़ा। लगभग 12 किमी की दूरी है। लेकिन नालन्दा पहुँचने से पहले राजगीर से लगभग 7 किमी की दू...
Brajesh Kumar Pandey
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इस यात्रा के बारे में शुरू से पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें–अब मेरी अगली मंजिल थी– विश्व शांति स्तूप। ब्रह्म कुण्ड से लगभग 2-2.5 किमी आगे चलने पर मुख्य सड़क छोड़कर बायें हाथ एक सड़क निकलती है जहाँ विश्व शांति स्तूप के बारे सूचना दी गयी है। मैं इसी सड़क पर मुड़ गया।...
शिवम् मिश्रा
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जब आदमी साइंस पढ़ता है त अपने आप को एतना बुद्धिमान समझने लगता है कि उसको बुझाता है जइसे दुनिया का सब सवाल का जवाब उसके पास है. लेकिन ऊ भुला जाता है कि पेड़ के ऊपर चढ़ा हुआ आदमी को दूर से आता हुआ रेलगाड़ी देखाई देता है, मगर पेड़ के नीचे खड़ा आदमी नहीं देख पाता है. इस...