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sanjiv verma salil
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बुंदेली गीत  -भुन्सारे चिरैया*नई आई,बब्बा! नई आईभुन्सारे चरैया नई आई*पीपर पै बैठत थी, काट दओ कैंने?काट दओ कैंने? रे काट दओ कैंने?डारी नें पाई तो भरमाईभुन्सारे चरैया नई आईनई आई,सैयां! नई आई*टला में पीयत ती, घूँट-घूँट पानीघूँट-घूँट पानी रे घूँट-घूँट पानीटला खों...
 पोस्ट लेवल : बुंदेली गीत bundeli geet
sanjiv verma salil
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बुंदेली गीत -*हम का कर रए?जे मत पूछो,तुम का कर रएजे बतलाओ?*हमरो स्याह सुफेद सरीखोतुमरो धौला कारो दीखोपंडज्जी ने नोंचो-खाओहेर सनिस्चर भी सरमाओघना बाज रओ थोथा दानाठोस पकाहिल-मिल खा जाओहम का कर रए?जे मत पूछो,तुम का कर रएजे बतलाओ?*हमरो पाप पुन्न सें बेहतरतुमरो पुन्न पा...
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Sandhya Sharma
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नौतपा की झुलसाने वाली गर्मी के बाद जब वर्षा की पहली फ़ुहार भूमि पर पड़ती है तो झींगुर का मन नाच उठता है, दादुरों को पुन: जीवन मिल जाता है और वे कूद-कूद कर बारिश के जल वाले स्‍थान की खोज में निकल पड़ते हैं। धरती में सोए बीज अंगड़ाई लेने लगते हैं। चातक पंख फ़ड़फ़ड़ाने लगता...