ब्लॉगसेतु

विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं )  संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
kumarendra singh sengar
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वैश्विक समुदाय के साथ कदमताल करने के प्रयास में लगभग सारा समाज पूरे जीजान से जुटा हुआ है. पश्चिमी सभ्यता के सुर-लय को पकड़ने की कोशिशों में हमने पहनावा, रहन-सहन, शालीनता, संस्कृति, भाषा, रिश्तों, मर्यादा आदि तक को दरकिनार करने से परहेज नहीं किया जा रहा है. पश्चिम से...
E & E Group
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अपने बुजुर्गों को स्मरण करने के लिए सनातन धर्म में हर महीने की अमावस्या तिथि है और 15 या 16 दिन चलने वाला श्राद्ध या महालय पर्व है। श्राद्ध पर्व इस बार 24 सितंबर से 8 अक्तूबर तक मनाया जाएगा। भाद्रपद पूर्णिमा से चलने वाला महालय पर्व सर्वपितृ अमावस्या के दिन समाप्त ह...
Pratibha Kushwaha
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बारह हजार करोड़ की रेमंड ग्रुप के मालिक 78 वर्षीय विजयपत सिंघानिया एक-एक पैसों के लिए मोहताज हो गए। उनके बेटे गौतम ने उन्हें न केवल घर से बेदखल कर दिया बल्कि गाड़ी व उनका ड्राइवर तक छीन लिया। मजबूर होकर विजयपत को बाम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर करके मुंबई स्थित एक घर...
शिवम् मिश्रा
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आज जून महीने का तीसरा रविवार है ... हर साल की तरह इस साल भी जून का यह तीसरा रविवार फदर्स डे  के रूप मे मनाया जा रहा है ... पर क्या सिर्फ एक दिन पिता को समर्पित कर क्या हम सब उस के कर्ज़ से मुक्त हो सकते है ... क्या यही है क्या वास्तव मे हमारा संतान धर्म...
PRABHAT KUMAR
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जब घर में शादी थी और बैंड बाजे के साथ दूल्हा चल रहा था, तो उसके दादा जी कमरे में बंद होकर पानी पीने को तरस रहे थे। घर के किवाड़ बंद थे बस एक कमरा खुला था, जिसमे दादाजी का एक फटा तौलिया बिछा हुआ था। न टाटपट्टी थी न ही कोई खाट। बस बिखरा बिखरा सा था पूरा सामान। उदासी थ...
सुशील बाकलीवाल
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ईश्वर आज अवकाश पर हैं, मंदिर की घंटी ना बजाइये ।जो बैठे हैं बूढ़े - बुज़ुर्ग,  अकेले पार्क में ...जाकर  उनके साथ कुछ समय बिताइये ।ईश्वर आज अवकाश पर है, मंदिर की घंटी ना बजाइये ।ईश्वर है पीड़ित परिवार के साथ, जो अस्पताल में आज परेशान है ...उस पीड़ित परिवार...
शिवम् मिश्रा
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आज जून महीने का तीसरा रविवार है ... हर साल की तरह इस साल भी जून का यह तीसरा रविवार फदर्स डे  के रूप मे मनाया जा रहा है ... पर क्या सिर्फ एक दिन पिता को समर्पित कर क्या हम सब उस के कर्ज़ से मुक्त हो सकते है ... क्या यही है क्या वास्तव मे हमारा संतान धर्म ?...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
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बड़े बूढ़ों की छत्र छाया में बड़े बूढ़ों की छत्र छाया में समय कितनी सरलता से गुजरा कभी अहसास तक नहीं हुआ उनके सब्र के पैमानेस्थितियों से निबटने के तरीके कभी सार्थक नहीं लगे आज जब वो नहीं हैंउनकी सार्थकता का पता चल रहा हैस्वयं पर क्रोध आ रहा हैउनके जीवन काल मेंउनके सोच...
राजीव कुमार झा
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आज के तथाकथित अत्याधुनिकता के इस युग में बुजुर्गों की उपेक्षा अधिक बढ़ी है.जबकि बुजुर्ग कभी उपेक्षा के पात्र नहीं हो सकते.किसी भी समाज के लिए उनकी भूमिका न केवल महत्वपूर्ण होती है बल्कि सामाजिक धरोहर के रूप में भी सामने आती है.पीढ़ियों के अंतराल के कारण वैचारिक मतभेद...