ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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बुन्देलखण्ड के लोक आयोजन में टेसू और झिंझिया का खेल बच्चों द्वारा खेला जाता है. आश्विन शुक्ल अष्टमी से शरद पूर्णिमा तक टेसू तथा नवमी से चतुर्दशी तक झिंझिया खेली जाती है. टेसू का खेल बालकों द्वारा तथा झिंझिया का खेल बालिकाओं द्वारा खेला जाता है. बाँस की तीन डंडियों...
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आधुनिकता का पर्याप्त प्रभाव होने के बाद भी बुन्देलखण्ड क्षेत्र में पावन पर्व कजली उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. यहाँ की लोक-परम्परा में शौर्य-त्याग-समर्पण-वीरता के प्रतीक मने जाने वाले कजली का विशेष महत्त्व है. इस क्षेत्र के परम वीर भाइयों, आल्हा-ऊदल के श...
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बुन्देलखण्ड क्षेत्र सदैव से अपने ताप के लिए जाना जाता रहा है. यहाँ की भीषण गर्मी, तपती दोपहरिया जैसे सबकुछ आग लगाने को आमादा रहती है. इसी जानलेवा गर्मी के बाद जब बारिश की फुहार लोगों के मन-मष्तिष्क को झंकृत करती है तो सभी लोग मगन हो उठते हैं. बारिश की बूँदें तपते ब...
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बुन्देलखण्ड क्षेत्र के कण-कण में ऐतिहासिकता, सांस्कृतिकता, पौराणिकता, दिव्यता, भव्यता समाहित है. झाँसी के गणेश बाजार स्थित महाराष्ट्र गणेश मंदिर में भी इनका समावेश देखने को मिलता है. भगवान गणेश को समर्पित इस मंदिर का अपना ही ऐतिहासिक महत्त्व है. इसी मंदिर में सन 18...
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भुन्जरियों का पावन पर्व कजली बुन्देलखण्ड क्षेत्र में आज भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. बुन्देलखण्ड क्षेत्र, जो विन्ध्य पर्वत श्रेणियों में बसा है, सुरम्य सरोवरों से रचा है, नैसर्गिक सुन्दरता से निखरा है वह सदैव ही अपनी संस्कृति, लोक-तत्त्व, शौर्य,...
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उत्तर प्रदेश का बुन्देलखण्ड क्षेत्र अनेकानेक प्राकृतिक संपदाओं से संपन्न होने के बाद भी भोजन, पानी की समस्या से परेशान बना रहता है. हालत इस तरह की हो चुकी है कि ग्रामीण अंचलों के बहुतायत गाँवों से युवाओं को पलायन करके शहरी क्षेत्रों की तरफ जाना पड़ रहा है. बारिश की...
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक पशन्ना आदि शिवराम तातिया के इतने सैनिकों का मुकाबला नही कर सकते थे। शिवराम तातिया ने इन अंग्रेजों से कहा वे बिठूर के नाना पेशवा धुधु पन्त के प्रति वफादार है और उनको पेशवा का आदेश है कि अंग्रेजों को कैद करके कानपुर लाया जाय। ग्रिफिथ, पस...
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक 17 जून 1857 को जालौन से भागने पर जालौन-ग्वालियर रोड पर पशन्ना और ग्रिफिथ को 53वीं नेटिव इन्फेंट्री की वह टुकड़ी मिली जो जालौन से खजाना लेकर ग्वालियर भेजी गई थी। यह टुकड़ी लौट रही थी मगर अब यह अंग्रेजों से बहुत नाराज थी। इसका कारण यह था क...
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक 16 जून को दिन में झाँसी के क्रांतिकारी सैनिकों का मुख्य दस्ता, 14वीं इररेगुलर घुड़सवार दस्ता कानपुर जाने के लिए रिसालेदार काले खां के साथ उरई पहुंचा। पहले ही लिखा जा चुका है कि इस दल का अग्रिम दस्ता तो 15 को उरई आ गया था परन्तु लूटखसोट...
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देवेन्द्र सिंह जी - लेखक केशवराव ने ब्राउन के पत्र को कोई महत्व नहीं दिया और जिले का प्रशासन संभाल कर अपने आदमियों को नियुक्त करना शुरू कर दिया। केशवराव तो शुरू से ही जालौन का राज प्राप्त करना चाहता था। जब जालौन राज की गोद का मामला 1840में आया मगर अंग्रेजों ने...