ब्लॉगसेतु

Kavita Rawat
191
..............................
ज्योति  देहलीवाल
29
बुढ़ापा, जिंदगी का एक ऐसा अंतिम पड़ाव हैं, जिसमें मनुष्य को सिर्फ़ प्यार चाहिए होता हैं। बुजुर्गों को केवल अपने बच्चों का साथ चाहिए होता हैं लेकिन ज्यादातर बुजुर्गों को वो भी नसीब नहीं होता। बुजुर्गों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए 1 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्ध...
विजय राजबली माथुर
163
स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं
मधुलिका पटेल
545
वृद्धावस्था की तैयारी कर्मों का लेखा जोखाशारीर नहीं दे कहीं धोखासहारे वाले हाथ नहीं हैंअब बच्चों व रिश्तेदारों की बारात नहीं हैअकेली सुबह हैखाली और काली संध्या हैसन्नाटे बन गए कान के बालेलटक-लटक कर शोर करते हैंआराम कुर्सी है हिलने वालीकुर्सी स्थिर है हिल रहा श...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
9
कर्म फल =======बचपन में कर्म सेमुंह चुराता रहाखेल कूद मेंसमय बिताता रहाजवानी में जोशसर पर चढ़ गयाइच्छाओं का दासबन गयाहोड़ के मकड़ जाल मेंफंस गयाना इच्छाएं पूरी हुईना जोश बाकी रहाहोश आया तब तकबुढ़ापा आ गयाअब बचपन कोयाद कर के रोता हैकर्म से ही फल मिलता हैअब समझ आ गय...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
9
ना तो अब दशरथ से पिता होते हैंना ही राम से पुत्र होते हैंकिसी को वनवास जाना पड़ेगा तो पिता को जाना पड़ेगा समय के साथ चलना पड़ेगा  पुत्र की हर बात को हँस कर मानना पड़ेगा बुढ़ापे का सहारा बनाना होगा संस्कारों का अर्थ बदलना होगा रामायण का नया रूप लिखना पड़ेगाअयोध्या को...
डा.राजेंद्र तेला निरंतर
9
उम्र अब किस्से सुनाने की नहीं किस्सों से सीखने की है ईर्ष्या द्वेष होड़ की नहीं  स्नेह प्रेम से जीने की है अनुभवों से दूसरों को सिखाने की है नए रिश्ते बनाने से पहले टूटे रिश्तों को जोड़ने की है किये अपराधों के  प्रायश्चित करने की है परमात्मा से दूरी...
संजय भास्कर
222
आने वाले दिनों में जब  हम सब         कविता लिखते पढ़ते बूढ़े हो जायेंगे ! उस समय लिखने के लिए शायद जरूरत न पड़े पर पढने के लिए  एक मोटे चश्मे की जरूरत पड़ेगी  जिसे आज के सम...
अरुण कुमार निगम
205
पीपल अब सठिया गया,रहा रात भर खाँसप्रेम पात सब झर गये , चढ़-चढ़ जावै साँस चढ़- चढ़ जावै साँस , कहाँ वह हरियाली हैआँख  मोतियाबिंद , उसी की  अब लाली हैछाँह गहे अब कौन , नहीं रहि छाया शीतलरहा रात भर खाँस, अब सठिया गया पीपल ||   अरुण कुमार निगमआदित्य नग...
Ashok kumar
460
आज भी मॉर्डन जीवन शैलीमेँ जल्दी बुढ़ापा आने कामतलब है कि शारीरिकऔर मानसिक तौर परजल्दी कमजोर हो जाना।दरअसल बढ़ती उम्र हमेँजीवन के आखिरी पड़ावबुढ़ापा या वृद्वावस्था तकपहुँचाता है। वृद्वावस्था वह अवस्थाहोती है जब शरीर की सुनने, देखने, बोलने, सूंघने, जीभ, त्वचा, मानसिक क्ष...
 पोस्ट लेवल : वृद्वावस्था बुढ़ापा