ब्लॉगसेतु

Sanjay  Grover
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आप भी देख ही रहे होंगे, एक न एक न्यूज़-चैनल दिखा रहा होगा कि किस तरह त्यौहारों पर हर जगह मिलावटी मिठाईयां मिलतीं हैं जो स्वास्थ्य के लिए बेहद ख़तरनाक़ होतीं हैं। यहां क़ाबिले-ग़ौर तथ्य यह है कि सभी त्यौहार धर्म से जुड़े हैं, दुकानदार और सप्लाईकर्त्ता भी धार्मिक ही होते...
Sanjay  Grover
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ग़ज़लजब खुल गई पहेली, तो है समझना आसांसच बोलना है मुश्क़िल, लेकिन है गाना आसां पहले तो झूठ बोलो, ख़ुद रास्ता बनाओफिर दूसरों को सच का रस्ता बताना आसांवैसे तो बेईमानी .. में हम हैं पूरे डूबेमाइक हो गर मुख़ातिब, बातें बनाना आसांजो तुम तलक है पहुंचा, उन तक भी पहुंच...
Sanjay  Grover
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लोग ग़ौर से देख रहे थे।कौन किसका पंजा झुकाता है ? कौतुहल.....उत्तेजना......सनसनी....जोश.....उत्सुकता......संघर्ष....प्रतिस्पर्धा.....प्रतियोगिता.....ईर्ष्या......नफ़रत......जलन.....धुंधला ही सही, लोगों को कुछ-कुछ नज़र आ हा था क्यों कि हाथों में अलग-अलग रंगों के द...
Sanjay  Grover
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मैं एक परिचित को बता रहा था कि सोशल मीडिया पर कोई नयी बात लिखो तो कैसे लोग पहले यह कहकर विरोध करते हैं कि ‘फ़लां आदमी बीमार मानसिकता रखता है’, ‘फ़लां आदमी ज़हर फैला रहा है’, ‘फ़लां आदमी निगेटिव सोच का है’. फिर उस आदमी को पर्याप्त बदनाम करके कुछ अरसे बाद वही बात अपने ना...
Sanjay  Grover
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04-07-2017मेरे पीछे का फ़्लैट(134-ए, पॉकेट-ए, दिलशाद गार्डन, दिल्ली) जो कई सालों से खाली पड़ा था, कुछ दिन पहले बिक गया है। कई दिनों से वहां से खटर-पटर, धूम-धड़ाम की आवाज़ें आ रहीं हैं। आज मैंने पिछले कई साल से बंद पड़ा अपने पिछले कोर्टयार्ड का दरवाज़ा खोला जो गंदगी से भर...
Sanjay  Grover
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एक बार मैंने फ़्लैट बेचने के लिए अख़बार में विज्ञापन दे दिया, बाद में उसे 4-5 बार रिपीट भी करवा दिया। एक सज्जन (लिखते समय थोड़ा शिल्प-शैली का ध्यान रखना पड़ता है वरना ‘श्रेष्ठजन’ उखड़ जाते हैं:-) जो प्रॉपर्टी का काम करते थे, मेरे पास चले आए कि हमारे होते अख़बार में विज...
Sanjay  Grover
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परसों जब मैं अपने ब्लॉग नास्तिक TheAtheist की अपनी एक पोस्ट ‘मनुवाद, इलीटवाद और न्याय’ के पृष्ठ पर गया तो देखा कि उसमें पाठकों के सवालों व राजेंद्र यादव के जवाबों से संबंधित लिंक काम नहीं कर रहा। क्लिक किया तो पता लगा कि संबंधित साइट देशकाल डॉट कॉम से यह...
अविनाश वाचस्पति
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इमेज़ पर क्लिक करके सीधे पढ़ सकेंगे सपने हकीकत बनने लगे, ‘आप’ मुझे अच्‍छे लगने लगे। अच्‍छाई तो अच्‍छी ही लगेगी, बेईमानी की अम्‍मा कब  तक खैर मनाएगी। आजकल सपनों का हकीकती ताना-बाना देख राजधानीवासी ही नहीं, अपितु संपूर्ण हिन्‍दुस्‍तान मंत्र-मुग्‍ध है। जो ‘आ...
महेन्द्र श्रीवास्तव
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खुलासा सप्ताह मना रही टीम अरविंद केजरीवाल फिलहाल चारो खाने चित हो गई है। वजह और कुछ नहीं बल्कि केजरीवाल समेत उनके अहम सहयोगियों पर नेताओं से कहीं ज्यादा गंभीर आरोप लगे हैं। हैरानी इस बात पर है कि खुद केजरीवाल की भूमिका पर भी उंगली उठी है। इसे ही कहते हैं " सिर मुड़...