ब्लॉगसेतु

Nitu  Thakur
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नवगीतबेबसी का दर्दनीतू ठाकुर 'विदुषी'मापनी~ 16/14चिड़िया आग दहकती में क्योंआज स्वयं को झोंक रही।लड़ती रहती छुरियों से जोजब गर्दन पर नोंक रही1देख रहे सब मौन तमाशा,ध्यान किसे है गैरों का।जहां गुजारा पूरा जीवन,शहर लगे वो औरों का।पालक पालें लहू पिलाकर,संताने बन जोंक रही।...
विजय राजबली माथुर
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Anita Gautam ०१-०७-२०१७ बेबसी (कहानी) अनिता गौतम.“मुबारक हो जय बाबू! नयी जिन्दगी बहुत बहुत मुबारक हो।”आत्मविश्वास से भरे डॉक्टर अनिल के ये शब्द जय बाबू के कानों में पड़े तब उन्हें अपने जीवित होने का अहसास हुआ, अन्यथा हृदयाघात के दूसरे दौरे ने तो उन्ह...
मधुलिका पटेल
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वो माँ का झूठ मूठ में पतीला खनकाना सब भरपेट खाओ बहुत है खाना फटी हुइ साड़ी को शाला से ढक लिया मेरी फीस का सारा जिम्मा अपने सिर कर लिया रात में ठंड से काँपती रहेऔर मुझे दो-दो दुशालें से ढांपती रहे मैं बरस दर बरस बढ़ता गया मेरी भावनाओं,...
डॉ शिव राज  शर्मा
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ख़्वाब, प्यार, वादा, वफ़ा, के कौन है दुश्मन ।ये है बेबसी, गरीबी,धोखा, तन्हाई और जुदाई ।बस नसीब का खेल है और कुछ नहीं प्यारेकिसी को गम मिला तो किसी ने ख़ुशी पाई ।----शिवराज---
मधुलिका पटेल
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जिस्म ने अपनी हल - चल खो दी थी  पर आत्मा अब भीजंग लड़ रही थी कानो में पिघल रहा था लाचारी बेबसी और  भयानकता का शोर जिस मोड़ पर देखे थे सुनहरे सपने  मन के अंधेरे कोने में बंद पड़े थे आत्मा ने बहुत कोशिश की इन बेजान सांसो में फिर खुशियाँ भर पाँऊ मन के अंधे...
मधुलिका पटेल
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वृद्धावस्था की तैयारी कर्मों का लेखा जोखाशारीर नहीं दे कहीं धोखासहारे वाले हाथ नहीं हैंअब बच्चों व रिश्तेदारों की बारात नहीं हैअकेली सुबह हैखाली और काली संध्या हैसन्नाटे बन गए कान के बालेलटक-लटक कर शोर करते हैंआराम कुर्सी है हिलने वालीकुर्सी स्थिर है हिल रहा श...
rishabh shukla
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मैंने अभी तक जो सुना  था, की अंडरवर्ड से सब डरते है । लेकिन फिर पता चला की, नेताओ से तो अंडरवर्ड भी,डरता है ॥ एक दिन मैंने देखा, की एक व्यक्ति टोल देने के बजाय,अपना एक कार्ड,प्रदर्शित करता है ॥ दूसरे ही दिन मै उसी व्यक्ति के...
rishabh shukla
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ममता और सौहार्द से बनी हुयी है माँ  !कोई कहे कुमाता कोई माता लेकिन है माँ  !!जिसके स्पर्श भर से बेटा  प्रसन्न हो उठता है !जिसके उठने से ही सुरज भी उठता है !!माँ  को देखकर बच्चा पुलकित  हो उठता है !बच्चो को पाकर माँ &nbsp...
rishabh shukla
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जब नारी ने जन्म लिया था !अभिशाप ने उसको घेरा था !!अभी ना थी वो समझदार !लोगो ने समझा मनुषहार !!उसकी मा थी लाचार ! लेकीन सब थे कटु वाचाल !! वह कली सी बढ्ने लगी ! सबको बोझ सी लगने लगी !! वह सबको समझ रही भगवान ! लेकीन सब थे हैवान !! वह बढन...
Anju choudhary(anu)
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(जीवन और आत्‍महत्‍या के बीच झूलता एक मासूम जीवन ...मासूम इस लिए कि  वो ये नहीं जानता की आत्महत्या करने वाले ने ऐसा किया क्यों ?) क्या मज़ाक समझा है जिंदगी और मौत के बीच एक पल की नाराज़गी इस जिंदगी से और जीवन समाप्त क्या ये मज़ाक लगता है | यूँ ही ऐसे ही अपने...