ब्लॉगसेतु

रवीन्द्र  सिंह  यादव
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कहीं बादल रहे उमड़कहीं आँधी रही घुमड़अब आ गयी धूप चुभती चिलचिलातीअब सूखे कंठ से चिड़िया गीत न गातीकोयल को तो मिल गया आमों से लकदक  बाग़कौआ ढूँढ़ रहा है मटका गाता फिरे बेसुरा रागचैतभर काटी फ़सल  बैसाख में खलिहान बदला ...
दिनेशराय द्विवेदी
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आज 14 अप्रैल 2018 को बैसाखी (वैशाखी) है। हालांकि अधिकांश वर्षों में यह दिन 13 अप्रेल को होता है, क्योंकि यह सूर्य की मेष संक्रांति के दिन होता है। आज हम जानते हैं कि हमारी पृथ्वी निरन्तर एक अंडाकार कक्षा में निरन्तर सूर्य की परिक्रमा करती रहती है। इस से होता यह है...
 पोस्ट लेवल : नववर्ष बैसाखी
शिवम् मिश्रा
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नमस्कार मित्रो, आज जहाँ एक ओर बैसाखी के पर्व को मनाने का अवसर है वहीं जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड के शहीदों को नमन करने का दिन भी है. बैसाखी पंजाब और आसपास के प्रदेशों का सबसे बड़ा त्योहार है. इसे पंजाब और हरियाणा के किसान सर्दियों की फसल काटने के बाद नए साल की ख़ुशी क...
Kajal Kumar
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दिनेशराय द्विवेदी
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भारतवर्ष एक ऐसा देश है जिस में आप नववर्ष की शुभकामनाएँ देते देते थक सकते हैं। लगभग हर माह कम से कम एक नया वर्ष अवश्य हो ही जाता है। उस का कारण यह भी है कि यही दुनिया का एक मात्र भूभाग है जहाँ दुनिया के विभिन्न भागों से लोग पहुँचे और यहीं के हो कर रह गए। उन्हों ने इ...
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सोने की  बैसाखी देकर, पाँव हमारे छीन लिए।नवयुग ने शहरीपन देकर, गाँव हमारे छीन लिए।।होली की फागों से सारा, जीवन ही रँग जाता था,और मल्हारों से सावन भी, मन्द-मन्द मुस्काता था,आपस के नातों की ममता का सागर लहराता था,जाति-धर्म का, ऊँच-नीच का, भेद नहीं भरमाता था,...
 पोस्ट लेवल : सोने की बैसाखी
girish billore
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