ब्लॉगसेतु

Bhavna  Pathak
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मम्मी अपनी बोली बोलोअंग्रेजी कुछ बुरी नहीं हैपर इसमें वो बात नहीं हैबोलो  जहां जरूरी बेशकघर पर नानी जैसी बोलोमम्मी अपनी बोली बोलोअपनी बोली सबको भाए बोलो जो सब समझ में आएहिंदी फैल रही तेजी सेमम्मी देखो आंखें खोलोमम्मी अपनी बोली बोलोपद मीरा दोहे कबीर केभजन...
sanjiv verma salil
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नवलेखन कार्यशाला:पाठ १.  भाषा और बोली मुख से उच्चारित होनेवाले सार्थक शब्दों और वाक्यों आदि का वह समूह जिसके द्वारा मन की बात बतलाई जाती है, भाषा कहलाता है। अपने मन की अनुभूतियाँ व्यक्त करने के लिए जिन ध्वनियों का प्रयोग किया जाता है उन्हें स्वन कहते हैं...
केवल राम
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गत अंक से आगे.....आम जनमानस बोली में ही अपने भावों को अभिव्यक्त करने की कोशिश करता है, उसके जीवन का हर पहलू बोली के माध्यम से बड़ी खूबसूरती के साथ अभिव्यक्त होता है. हम अगर भाषा का गहराई से अध्ययन करते हैं तो पाते हैं कि भाषा में प्रयुक्त कुछ शब्द भाव सम्प्रेषण में...
केवल राम
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गत अंक से आगे.....मनुष्य जीवन की प्रारम्भिक अवस्था में अपने परिवेश से शब्दों के उच्चारण सीखता है. अधिकतर यह देखा गया है कि बच्चा सबसे पहले ‘माँ’ शब्द का ही उच्चारण करता है. फिर धीरे-धीरे वह अपनी जरुरत और सुविधा के हिसाब से शब्दों को सीखता है और उनका प्रयोग करता है....
केवल राम
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गतअंक से आगे...भावों की अभिव्यक्ति के लिए मनुष्य ही नहीं, बल्कि जीव जन्तु भी कुछ ध्वनि संकेतों का प्रयोग करते हैं. हालाँकि हम उनके ध्वनि संकेतों को समझ नहीं पाते, लेकिन सामान्य व्यवहार में देखा गया है कि वह ऐसा करते हैं. जीवन की हर स्थिति में वह भी अपने भावों की अभ...