प्रायवेट वार्ड नं. ३जिन्दगी/मौत के मध्यजूझती संघर्ष करती गूंज रहे हैं तो केवल गीत जो उसने रचे जा पहुंची हो जैसे सूनी बर्फीली वादियों मेंवहाँ भी अकेली नहीं साथ है तन्हाइयां यादों के बड़े-बड़े चिनारमरणावस्था में पड़ीअपनी ही प्रतिध्वनि सुन बहती जा रही है किसी हिमनद की तर...