ब्लॉगसेतु

सतीश सक्सेना
0
हिंदी जगत में ब्लॉगिंग का आगमन , हिंदी के नवोदित लेखकों के लिए संजीवनी का काम कर गया , झिझकती लड़खड़ाती शर्मीली सैकड़ों कलमें हिंदी की चाल दिखाने के लिए फ्लोर पर पहली बार जब आयीं थी तो उनमें कितनी ही खड़े होने लायक भी नहीं थीं , मगर पाठक रुपी दर्शकों ने वाह वाह कर...
सतीश सक्सेना
0
मोहन श्रोत्रिय की वाल से बेहद दुखद खबर है कि मशहूर शायर डॉ अमर नदीम नहीं रहे ....  डॉ अमर नदीम एक बेहतरीन संवेदनशील व्यक्तित्व थे उनका अचानक चला जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है , कमजोर ग़रीबों के लिए उठने वाली एक मजबूत आवाज हमेशा के लिए शांत हो गयी , बेहद बुरी...
 पोस्ट लेवल : ब्लागर गज़ल अमर नदीम
दिनेशराय द्विवेदी
0
हिन्दी ब्लागों को पढ़ते और टिपियाते हुए सुझाव आया कि मुझे भी ब्लाग लिखना चाहिए। 28 अक्टूबर 2007 को मेरा जो पहला ब्लाग सामने आया वह "तीसरा खंबा" था।"तीसरा खंबा" के माध्यम से विधि के क्षेत्र में कुछ अलग करने का मन था। कुछ किया भी, लेकिन टिप्पणियों में यह फरमाइश होने...
सतीश सक्सेना
0
ब्लॉग लेखन में कुछ सक्रियता तो आयी मगर आवश्यकता इस उत्साह को बनाये रखने की है ! हमें विस्तार से विगत का आकलन करना होगा अन्यथा कुछ दिनों में सब जोश ठंडा हो जाएगा !फेसबुक के शुरू होने के साथ अधिकतर ने ब्लॉग लेखन बंद कर दिया इसके पीछे उन्हें कमेंट का न मिलना या कमेंट...
सतीश सक्सेना
0
ब्लॉग लेखन में कोई संदेह नहीं कि टिप्पणियां जीवनदान का काम करती हैं , अगर सराहा न जाय तब बड़े बड़े कलम भी घुटनों के  बल बैठते नज़र आएंगे ! मेरे शुरुआत के दिनों में उड़नतश्तरी की त्वरित टिप्पणियों का बड़ा योगदान रहा है और आज भी मैं उनका शुक्र गुज़ार हूँ,  तब से...
सतीश सक्सेना
0
मेरे लिए ब्लॉगिंग करना हमेशा स्फूर्तिदायक रहा है, ब्लॉगिंग मेरे लिए पहले दिन से लेकर आजतक मेरे विचारों का एकमात्र संकलन स्थल रहा है और इसकी उपयोगिता मेरे लिए कभी कम नहीं हुई भले ही लोग आएं या न आएं ! शुरू से लेकर अबतक लगभग ४ पोस्ट प्रति माह लिखता रहा हूँ जो लगातार...
दिनेशराय द्विवेदी
0
1 जुलाई का दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है। खास तौर पर हमारे भारत देश में इस का बड़ा महत्व है। यदि केलेंडर में यह व्यवस्था हो कि आजादी के बाद के 70 सालों में किसी तारीख में पैदा हुए लोगों की संख्या उस तारीख के खांचे में लिखी मिल जाए तो 1 जुलाई की तारीख का महत्व तुरन्त...
विजय राजबली माथुर
0
 पुष्पा अनिल जी से साभार वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद जोशी जी की यह पोस्ट गंभीर चिंतन की अपेक्षा करती है। इसमें मैं इतना और जोड़ना चाहता हूँ कि, पढे-लिखे और विद्वान होने के बावजूद ट्विटर,फेसबुक व ब्लाग्स लेखक अपने में कुछ घोर स्वार्थी एवं दुष्ट लोगों को भी स...
सतीश सक्सेना
0
अविनाश वाचस्पति ब्लॉगिंग सभा संचालित करते हुए नुक्कड़ भी अचानक से , यूँ अनाथ हो गया ! ऐसा भी क्या हुआ, ये चमन ख़ाक हो गया !अविनाश के जाते ही,कुछ सुनसान सा लगे ब्लॉगिंग में मुन्नाभाई भी, इतिहास हो गया !कितने ही दिन से लड़ रहा था...
Vivek Rastogi
0
    आज से ठीक पाँच वर्ष पूर्व हमने अपने पाँच वर्ष पूर्ण होने पर यह पोस्ट लिखी थी और अब हमें ब्लागिंग में दस वर्ष पूरे हो गये हैं, इस दौरान लगभग 1100 पोस्टों का आँकड़ा हम छूने वाले हैं, और बहुत उससे कहीं ज्यादा प्रतिक्रियाएँ मिली हैं। ब्लॉगिंग जब शुर...