ब्लॉगसेतु

girish billore
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 पोस्ट लेवल : ब्लॉगर ब्लॉग चिंतन
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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मैं अपने ऑफ़िस में बैठा मेज पर पड़ी बिलों और चेकों पर हस्ताक्षर करने में व्यस्त था कि अचानक मेरे नथुने फड़फड़ा उठे। चंदन की जोरदार ख़ुशबू पूरे कमरे में भर गयी थी। मेरा ध्यान बरबस कमरे में आए उन सज्जन की ओर चला गया जो हाथ में एक दरख़ास्त लिए मेरे सामने खड़े थे। वे एक बुजुर...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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जबसे ब्लॉगरी शुरू हुई है, ज़िन्दगी बदल गयी है। कम्प्यूटर आने के बाद इसपर लिखना पढ़ना शुरू करते वक्त हर्षजी ने इसकी सम्भावना से आगाह तो किया था, लेकिन मुझे अपने ऊपर पूरा भरोसा था कि मैं अपने प्यारे से परिवार के हक़ में कोई कटौती नहीं होने दूंगा। जब खतरे ने पहली बार दर...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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हिन्दी ब्लाग जगत में अनेक नारीवादी चिट्ठे पढने और उनपर आने वाली गर्मा-गरम टिप्पणियों और प्रति-टिप्पणियों को पढ़ने के बाद मन में हलचल मच ही जाती है। ‘चोखेरबाली’ और ‘नारी ’ ब्लाग के क्या कहने…। समुद्र मंथन में एक से एक अमूल्य रत्न-सुभाषित निकल कर आ रहे हैं। बीच-बीच...
girish billore
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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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आजकल चिठ्ठाजगत में दूसरों के लिखे व्यक्तिगत पत्र सार्वजनिक करने का दौर जोर पकड़ रहा है। पंगेबाज अरुण जी ने अपने किसी डॉक्टर मित्र का प्रेमिका को लिखा पत्र उसकी डायरी से उड़ाकर बाँचने की कोशिश की तो शिवकुमार जी ने उसके अनुवाद की आउटसोर्सिंग कराके अपने ब्लॉग पर ठेल दिय...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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ब्लॉग लेखन प्रारंभ करने के बाद मुझे जिन लोगो के लिखने से प्रेरणा मिलती रही है और जिनका सम्बल मिलता रहा है उनमें घुघूती बासूती जी एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। पिछले दिनों घुघूती जी ने एक कविता पोस्ट की 'पैन्ड्यूलम' शीर्षक से। मैं इसपर तत्काल टिप्पणी नहीं कर सका क्यो...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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ऑफिस में आज काम कुछ ज्यादा था। महीने की शुरुआत में वेतन और पेंशन का काम बढ़ ही जाता है। …शाम को करीब सात बजे घर पहुँचा। …शारीरिक थकान के बावज़ूद मन में यह जानने की उत्सुकता अधिक थी कि सुबह-सुबह ब्लॉगवाणी में आयी जिन पोस्टों पर धुँवाधार टिप्पणी कर आया था, उसपर अन्य चि...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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ब्लॉग मण्डली दहल रही है, मचल रहे तूफान से।चरमपंथ की हवा चली है, मध्यमार्ग हलकान से॥१॥ ‘मसि’जीवी अब हुआ पुरातन, ‘माउस’जीवी उछल रहा,धूल खा रही कलम-दवातें, बिन कागज सब निकल रहा।नयी प्रोफ़ाइल खोल रहे हैं, ब्लॉगर देखो शान से;चरमपंथ की हवा चली है, मध्यमार्ग हलकान से॥२॥स्व...
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
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साहित्यकार बनाम ब्लॉगर को लेकर अच्छी बहस छिड़ी है। बहुत रोचक विषय पर चर्चा चल पड़ी है। साहित्य की परिभाषा गढ़ने या इसकी औकात बताने की मेरी कोई नीयत नहीं है और न ही मैं ऐसी क्षमता का भ्रम ही पाले बैठा हूँ। किन्तु मेरा मानना है कि सभ्यता के विकास में मनुष्य ने बहुत से क...