ब्लॉगसेतु

rashmi prabha
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हादसे स्तब्ध हैं, ... हमने ऐसा तो नहीं चाहा था !घर-घर दहशत में है,एक एक सांस में रुकावट सी है,दबे स्वर,ऊंचे स्वर में दादी,नानी कह रही हैं,"अच्छा था जो ड्योढ़ी के अंदर ही हमारी दुनिया थी"नई पीढ़ी आवेश में पूछ रही,"क्या सुरक्षित थी?"बुदबुदा रही है पुरानी पीढ़ी,"ना,...
rashmi prabha
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मैं वृक्ष,वर्षों से खड़ा हूँजाने कितने मौसम देखे हैं मैंने,न जाने कितने अनकहे दृश्यों का,मौन साक्षी हूँ मैं !पंछियों का रुदन सुना है,बारिश में अपनी पत्तियों का नृत्य देखा है,आकाश से मेरी अच्छी दोस्ती रही है,क्योंकि धरती से जुड़ा रहा हूँ मैं ।आज मैंने अपने शरीर से वस्...
समीर लाल
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अगर आपके पास घोड़ा है तो जाहिर सी बात है चाबुक तो होगी ही. अब वो चाबुक हैसियत के मुताबिक बाजार से खरीदी गई हो या पतली सी लकड़ी के सामने सूत की डोरी बाँधकर घर में बनाई गई हो या पेड़ की डंगाल तोड़ कर पत्तियाँ हटाकर यूँ ही बना ली गई हो. भले ही किसी भी तरह से हासिल की गई ह...
rashmi prabha
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पहले पूरे घर मेंढेर सारे कैलेंडर टँगे होते थे ।भगवान जी के बड़े बड़े कैलेंडर,हीरो हीरोइन के,प्राकृतिक दृश्य वाले, ...साइड टेबल पर छोटा सा कैलेंडररईसी रहन सहन की तरहगिने चुने घरों में ही होते थेफ्रिज और रेडियोग्राम की तरह !तब कैलेंडर मांग भी लिए जाते थे,नहीं मिलते तो...
समीर लाल
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दुआ, प्रार्थना, शुभकामना, मंगलकामना, बेस्ट विशेस आदि सब एक ही चीज के अलग अलग नाम हैं और हमारे देश में हर बंदे के पास बहुतायत में उपलब्ध. फिर चाहे आप स्कूल में प्रवेश लेने जा रहे हों, परीक्षा देने जा रहे हों, परीक्षा का परिणाम देखने जा रहे हों, बीमार हों, खुश हों, इ...
rashmi prabha
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मृत्यु अंतिम विकल्प है जीवन काया जीवन का दूसरा अध्याय है ?जहाँ हम सही मायनों मेंआत्मा के साथ चलते हैंया फिर अपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति कारहस्यात्मक खेल खेलते हैं ?!औघड़,तांत्रिक शव घाट पर हीखुद को साधते हैं... आखिर क्यों !जानवरों की तरह मांस भक्षण करते हैंमदिरा का सेव...
समीर लाल
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बचपन से ही मैं बाँये हाथ से लिखता था. लिखने से पहले ही खाना खाना सीख गया था, और खाता भी बांये हाथ से ही था. ऐसा भी नहीं था कि मुझे खाना और लिखना सिखाया ही बाँये हाथ से गया हो लेकिन बस जाने क्यूँ, मैं यह दोनों काम ही बांये हाथ से करता.पहले पहल सब हँसते. फिर डाँट पड़न...
rashmi prabha
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मन को बहलानेऔर भरमाने के लिएमैंने कुछ ताखों परतुम्हारे होने की बुनियाद रख दी ।खुद में खुद से बातें करते हुएमैंने उस होने में प्राण प्रतिष्ठा की,फिर सहयात्री बन साथ चलने लगी,चलाने लगी ...लोगों ने कहा, पागल हो !भ्रम में चलती हो,बिना कोई नाम दिए,कैसे कोई ख्याली बुत बन...
समीर लाल
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कुछ लोग नमस्कार करने में पीर होते हैं और कुछ नमस्कार करवाने में. नमस्कार करने वाले पीर, चाहे आपको जाने या न जाने, नमस्ते जरुर करेंगे. कुछ हाथ जोड़ कर और कुछ सर झुका कर, शायद उनको मन ही मन यह शान्ति प्राप्त होती होगी कि अगले को नमस्ते किया है और उसने जबाब भी दिया है...
समीर लाल
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१२ वीं के परिणाम घोषित हुए. लड़कियों ने फिर बाजी मारी. ये अखबार की हेड लाईन्स बता रही थी. जिस बच्ची ने टॉप किया था उसे ५०० में से ४९६ अंक मिले हैं यानि सारे विषय मिला कर मात्र ४ अंक कटे, बस! ये कैसा रिजल्ट है?हमारे समय में जब हम १० वीं या १२ वीं की परीक्षा दिया करते...