ब्लॉगसेतु

शिवम् मिश्रा
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प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,प्रणाम !" एक रोटी की कहानी "==========================डाइनिंग टेबल पर खाना देखकरबच्चा भड़का... फिर वही सब्जी,रोटी और दाल मेंतड़का....?मैंने कहा था न कि मैंपिज्जा खाऊंगारोटी को बिलकुल हाथनहीं लगाउंगाबच्चे ने थाली उठाई और बाहरगिराई.......?------...
शिवम् मिश्रा
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प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,प्रणाम !लीजिये एक लतीफा सुनिए ... मेरा मतलब है पढ़िये ...  आज फेसबुक पर दर्शन बवेजा जी की प्रोफ़ाइल पर पढ़ा तो यहाँ आप सब को भी पढ़वाने ले आया !बॉस : अगर मेरे हवाई जहाज़ में 50 ईंटे हो और मैं एक नीचे फ़ेंक दूं तो कितनी बचेंगी....? एम्पलोयी : 49...
शिवम् मिश्रा
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प्रिय ब्लॉगर  मित्रों ,प्रणाम !आज १५ मई है ... आज अमर शहीद सुखदेव जी की १०६ वीं जयंती है ! सुखदेव जी का जन्म पंजाब के शहर लायलपुर में श्रीयुत् रामलाल थापर व श्रीमती रल्ली देवी के घर विक्रमी सम्वत १९६४ के फाल्गुन मास में शुक्ल पक्ष सप्तमी तदनुसार १५ मई १९०७ क...
शिवम् मिश्रा
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ब्लॉग बुलेटिन के सभी पाठकों को मेरा नमस्कार !!मैं हर्षवर्धन श्रीवास्तव,आज से ब्लॉग बुलेटिन टीम में एक नए रिपोर्टर के रूप में जुड़ रहा हूँ। आशा है कि आपको मेरी पहली बुलेटिन पसंद आएगी। धन्यवाद।।आज सिर्फ हैड लाइन्स अमर उजाला पोर्टल / ब्लॉग-एग्रीगेटर हेतु हिंदी ब्लॉगरो...
शिवम् मिश्रा
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वैसाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया को ‘अक्षय तृतीया’ कहते हैं। इस साल यह सोमवार यानी आज 13 मई को मनाई जा रही हैं। अक्षय का शाब्दिक  अर्थ है ‘अक्षय’ अर्थात जो ‘सदा-सर्वदा’ रहे। जिसका क्षय न हो। लोक भाषाओं में इसे ‘आखातीज’, ‘अखाती’  और ‘अकाती’ कहा जाता है। &...
शिवम् मिश्रा
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प्रिय ब्लॉगर मित्रों,प्रणाम !हर साल मई महीने के दूसरे रविवार को मदर्स डे मनाए जाने की रवायत है ... यूँ तो हम भारतवासियों को माँ के प्रति अपना लगाव या सम्मान दिखाने के किसी खास दिन की कभी कोई जरूरत ही नहीं रही पर अब जब एक रवायत चल ही पड़ी है तो भला हम ही पीछे क्यों र...
शिवम् मिश्रा
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प्रिय ब्लॉगर मित्रो,प्रणाम !कल १० मई थी ... सन १८५७ का प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम इसी दिन शुरू हुआ था | आज मैं आपको इस स्वतंत्रता संग्राम मे मैनपुरी जिले के योगदान के बारे मे कुछ बताने जा रहा हूँ !मैनपुरी का क़िला वैसे तो मैनपुरी जिले का इतिहास वीर गाथा...
शिवम् मिश्रा
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गुलज़ार साहब की एक नज़्म है फिल्म “गृह-प्रवेश” से, उसमें एक बहुत ख़ूब्सूरत लाइन है:इच्छाओं के भीगे चाबुक, चुपके-चुपके सहता हूँ,लोगों के घर यूँ लगता है, मोज़े पहने रहता हूँ.ख़ाली पाँव कब आँगन में बैठूँगा, कब घर होगा!घर – दो अक्षरों के मेल से बना बिना मात्रा का शब्द....
शिवम् मिश्रा
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प्रिय ब्लॉगर मित्रों ,प्रणाम ! साहित्य, संगीत, रंगमंच और चित्रकला सहित विभिन्न कलाओं में महारत रखने वाले गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर मूलत: प्रकृति प्रेमी थे। वह देश विदेश चाहे जहां कहीं रहे वर्षा के आगमन पर हमेशा शांतिनिकेतन में रहना पसंद करते थे। रविंद्रनाथ...
शिवम् मिश्रा
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ज़िन्दगी से बचपन चला गया,खो गई रिश्तों की गर्माहट,बेमानी हो गई हया .......... हर युग में कुछ अनोखा होता है,कुछ परिवर्तन,कुछ नयापन - पर जड़ से मिट जाये जो एहसास या हो फिर प्रयास तो कहना होगा -कोई अनोखी नहीं ऐसी ज़िन्दगी लेकिन खूब न हो ......पर यहाँ तो जो भी मिल...