ब्लॉगसेतु

शिवम् मिश्रा
3
नमस्कार साथियो, व्यावहारिक रूप से हमने भले ही आज़ादी सन 1947 में पाई हो मगर हम एक तरह से  30 दिसंबर 1943 को ही आजाद हो गए थे. इसी दिन देश के एक क्रांतिकारी बेटे ने स्वतंत्र भारत के रूप में राष्ट्र ध्वज फहराया था. देश के जन-जन में बसे महान स्वतंत्रता सेनानी और आ...
शिवम् मिश्रा
3
नए वर्ष की आगोश में पुराना साल अपनी उम्र के 365वें  दिन की ख़ुमारी में गुनगुना रहा है  ... दिल ढूँढता है फिर वही फ़ुरसत के रात दिनबैठे रहे तसव्वुर-ए-जानाँ किये हुएफेसबुक किसी ब्लॉग से कम नहीं, तो कुछ खास के खास कलम के साथ मनाते हैं उत्सव वार्षिक अ...
शिवम् मिश्रा
3
ऐ जाते वर्ष ठहरो,अभी सुनाना है बहुत कुछ रोक लो घड़ी की सुइयों को कुछ एहसासों को रेखांकित कर दो  ... 2018 की अवलोकन यात्रा में प्रस्तुत है आज उड़न तश्तरी ....: शेक्सपियर सही कहे थे कि नाम में क्या ... अच्छा हुआ शेक्सपियर मौका देख कर १६१६...
शिवम् मिश्रा
3
समय समापन की ओर है और अवलोकन यात्रा के मध्य में है, तो लेती हूँ कुछ ब्लॉग्स एकसाथ।  निःसंदेह, इसके बाद भी मैं अतृप्त रह जाऊँगी, क्योंकि रह जाएंगे कुछ ब्लॉग्स, अनपढ़े रह जाएंगे कुछ दिग्गज ब्लॉगर।  तो क्षमायाचना के साथ अपनी क्षमता के अनुसार लाती हूँ कुछ...
शिवम् मिश्रा
3
मन के कोने से...मंटू कुमार जी ने 2018 में एक ही आलेख पोस्ट किया है, और मैं उसे लेने का लोभ संवरण नहीं कर पाई, निःसंदेह शीर्षक का जादू है यह। अमृता-इमरोज़ और भाग्यश्री...एक वो लड़का भी।  [यह कहानी जैसा कुछ "लल्लनटॉप कहानी कम्पटीशन" के लिए लिखी थी जो कि साहित...
शिवम् मिश्रा
3
गगन शर्मा कुछ अलग सा  कहें या कुछ ख़ास सा।  जीवन के असली घुमावदार रास्ते में कई चिंतन पड़े होते हैं, जिसे इन्होंने काफ़ी हद तक संजोया है।  चलिए आज 2018 से एक उठाते हैं  ... कुछ अलग सा: ताश, कुछ जाने-अनजाने रोचक तथ्य !  ताश, अच्छ...
शिवम् मिश्रा
3
तिरछी नज़र  गोपेश जायसवाल जी के तठस्थ विचारों का ब्लॉग है, जिसे पढ़ते हुए आप परमराओं की गलियों से गुजरने का सुकून ले सकते हैं।    तिरछी नज़र : गुरुवे नमः  यह किस्सा मुझे मेरे मौसाजी, स्वर्गीय प्रोफ़ेसर बंगालीमल टोंक, जो कि आगरा...
शिवम् मिश्रा
3
मुकेश पाण्डेय "चन्दन"  विचारों की रेल चल रही .........चन्दन की महक के साथ ,अभिव्यक्ति का सफ़र जारी है . क्या आप मेरे हमसफ़र बनेगे ?"मुकेश पाण्डेय "चन्दन": एक किला जहाँ पूरी बारात ही ...  बुंदेलखंड भारत के इतिहास में एक उपेक्षित क्षेत्र रहा है, जब...
शिवम् मिश्रा
3
उलूक टाइम्सना कविता लिखता हूँ ना कोई छंद लिखता हूँ अपने आसपास पड़े हुऎ कुछ टाट पै पैबंद लिखता हूँ ना कवि हूँ ना लेखक हूँ ना अखबार हूँ ना ही कोई समाचार हूँ जो हो घट रहा होता है मेरे आस पास हर समय उस खबर की बक बक यहाँ पर देने को तैयार हूँ । सुशील कुमार जोशी&nbsp...
शिवम् मिश्रा
3
लगन कहें या अगन - कुछ ख़ास नामों में से एक नाम है शिखा वार्ष्णेय  कब से पढ़ रही हूँ, याद नहीं, पर जब भी पढ़ा, जितना भी पढ़ा एक अर्थ मिला। एक नया अध्याय - स्पंदन  21212 VIEWSबच्चे न तो आपकी मिल्कियत होते हैं न ही फिक्स डिपॉजिट जिन्हें आप जब...