ब्लॉगसेतु

rashmi prabha
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मृत्यु अंतिम विकल्प है जीवन काया जीवन का दूसरा अध्याय है ?जहाँ हम सही मायनों मेंआत्मा के साथ चलते हैंया फिर अपूर्ण इच्छाओं की पूर्ति कारहस्यात्मक खेल खेलते हैं ?!औघड़,तांत्रिक शव घाट पर हीखुद को साधते हैं... आखिर क्यों !जानवरों की तरह मांस भक्षण करते हैंमदिरा का सेव...
समीर लाल
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बचपन से ही मैं बाँये हाथ से लिखता था. लिखने से पहले ही खाना खाना सीख गया था, और खाता भी बांये हाथ से ही था. ऐसा भी नहीं था कि मुझे खाना और लिखना सिखाया ही बाँये हाथ से गया हो लेकिन बस जाने क्यूँ, मैं यह दोनों काम ही बांये हाथ से करता.पहले पहल सब हँसते. फिर डाँट पड़न...
Akshitaa (Pakhi)
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21वीं सदी टेक्नॉलाजी की है। आज बच्चे  कलम बाद में पकड़ते हैं , मोबाइल, टेलीवीजिन, कम्प्यूटर व लैपटॉप पर हाथ पहले से ही फिराने लगते हैं। ऐसे में उनका सृजनात्मक दायरा भी बढ़ रहा है। ऐसी ही एक नन्ही प्रतिभा हैं- अक्षिता (पाखी) यादव। 12 वर्षीया अक्षिता न सिर्फ नन्ही...
Krishna Kumar Yadav
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देश-विदेश में इंटरनेट पर हिंदी के व्यापक प्रचार-प्रसार और ब्लॉगिंग के माध्यम से अपनी रचनाधर्मिता को विस्तृत आयाम देने वाले लखनऊ (मुख्यालय) परिक्षेत्र, उत्तर प्रदेश  के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव के ब्लॉग  "डाकिया डाक लाया" (http://dakbabu.blogspot...
rashmi prabha
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मन को बहलानेऔर भरमाने के लिएमैंने कुछ ताखों परतुम्हारे होने की बुनियाद रख दी ।खुद में खुद से बातें करते हुएमैंने उस होने में प्राण प्रतिष्ठा की,फिर सहयात्री बन साथ चलने लगी,चलाने लगी ...लोगों ने कहा, पागल हो !भ्रम में चलती हो,बिना कोई नाम दिए,कैसे कोई ख्याली बुत बन...
समीर लाल
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कुछ लोग नमस्कार करने में पीर होते हैं और कुछ नमस्कार करवाने में. नमस्कार करने वाले पीर, चाहे आपको जाने या न जाने, नमस्ते जरुर करेंगे. कुछ हाथ जोड़ कर और कुछ सर झुका कर, शायद उनको मन ही मन यह शान्ति प्राप्त होती होगी कि अगले को नमस्ते किया है और उसने जबाब भी दिया है...
समीर लाल
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१२ वीं के परिणाम घोषित हुए. लड़कियों ने फिर बाजी मारी. ये अखबार की हेड लाईन्स बता रही थी. जिस बच्ची ने टॉप किया था उसे ५०० में से ४९६ अंक मिले हैं यानि सारे विषय मिला कर मात्र ४ अंक कटे, बस! ये कैसा रिजल्ट है?हमारे समय में जब हम १० वीं या १२ वीं की परीक्षा दिया करते...
समीर लाल
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कालेज के दिनों की याद आई. हम दोस्तों के साथ पिकनिक पर जाया करते थे तो सब मिलकर चिकन पकाते थे. वो स्वाद अब तक जुबान पर है और बनाने की विधि भी कुछ कुछ याद थी. बस फिर क्या था, मैंने एलान कर दिया कि आज रसोई खाली करो, चिकन हम बनाएंगे.अँधा क्या चाहे, दो आँखें. पत्नी तुरं...
समीर लाल
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बाजार जाता हूँ तो देख कर लगता है कि जमाना बहुत बदल गया है. साधारण सी स्वभाविक बातें भी बतानी पड़ती है. कल जब दही खरीदने लगा तो उसके डिब्बे पर लिखा था कि यह पोष्टिक दही घास खाने वाली गाय के दूध का है. मैं समझ नहीं पाया कि इसमें बताने जैसा क्या है? गाय तो घास ही खाती...
समीर लाल
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बचपन में वह बदमाश बच्चा था. जब बड़ा हुआ तो गुंडा हो गया. और बड़ा हुआ तो बाहुबली बना. फिर जैसा कि होता है, वह विधायक बना और फिर मंत्री भी. नाम था भगवान दास.रुतबे और कारनामों की धमक ऐसी कि पुलिस भी काँप उठे. कम ही होते हैं जो इस कहावत को धता बता दें कि पुलिस से बड़ा कौन...