ब्लॉगसेतु

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यह ख़त भगत सिंह ने जेल में रहते हुए लिखा था और यह 27 सितम्बर 1931 को लाहौर के अखबार 'द पीपल' में छपा था। इसमें भगतसिंह ने ईश्वर की मौजूदगी पर कई तर्कपूर्ण सवाल खड़े किये हैं और इस संसार के निर्माण, इंसान के जन्म, ईश्वर की कल्पना के साथ-साथ संसार में मनुष्य की दीनता,...
 पोस्ट लेवल : भगत सिंह
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30 सितम्बर, 1930 को भगत सिंह के पिता सरदार किशन सिंह ने ट्रिब्यूनल को अर्जी देकर बचाव पक्ष के लिए अवसर देने की मांग की थी। पिता की अर्जी से भगत सिंह की भावनाओं को भी चोट लगी थी, लेकिन अपनी भावनाओं पर काबू कर सिद्धान्तों पर जोर देते हुए उन्होंने 4 अक्तूबर, 1930 को य...
 पोस्ट लेवल : भगत सिंह
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इंकलाब के दौरान यतीन्द्रनाथ दास 63 दिन की भूख हड़ताल के बाद शहीद हुए। उस समय 'माडर्न रिव्यू’ पत्रिका के सम्पादक रामानन्द चट्टोपाध्याय ने यतीन्द्रनाथ दास की शहादत, जनता की तरफ से शहीद के सम्मान और भगत सिंह के ‘इन्कलाब जिन्दाबाद’ के नारे की आलोचना की। इसका जवाब ...
 पोस्ट लेवल : भगत सिंह
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भगत सिंह लाहौर के नेशनल कॉलेज के छात्र थे। एक सुंदर-सी लड़की आते-जाते उन्हें देखकर मुस्कुरा देती थी और सिर्फ भगत सिंह की वजह से वह भी क्रांतिकारी दल के करीब आ गई। जब असेंबली में बम फेंकने की योजना बन रही थी तो भगत सिंह को दल की जरूरत बताकर साथियों ने उन्हें यह जिम्...
 पोस्ट लेवल : भगत सिंह
शिवम् मिश्रा
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आज ८ अप्रैल है ... आज का दिन समर्पित है क्रांति को ... जहाँ एक ओर सन १८५७ के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पांडे जी की १६१ वीं पुण्यतिथि है वही दूसरी ओर सन १९२९ के सेंट्रल असेम्बली बम कांड की ८९ वीं वर्षगांठ है |आइये इन के बारे में...
kumarendra singh sengar
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सन 2014 के बाद जैसे ही केंद्र में सत्ता परिवर्तन हुआ वैसे ही बहुत सारे लोगों ने राष्ट्र, राष्ट्रवाद देशभक्ति के बारे में अपने-अपने मानक तय करने आरम्भ कर दिए. ऐसा नहीं कि इसमें विपक्ष ही शामिल रहा बल्कि सत्ता पक्ष की तरफ से भी इस तरह के मानक बनाये जाते दिखे. बावजूद...
शिवम् मिश्रा
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"…व्यक्तियो को कुचल कर , वे विचारों को नहीं मार सकते।"- शहीद ए आज़म सरदार भगत सिंह जी  ८८ वें बलिदान दिवस पर अमर शहीद सरदार भगत सिंह जी , सुखदेव जी और राजगुरु जी को शत शत नमन ! इंकलाब ज़िंदाबाद !!
शिवम् मिश्रा
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 "अहिंसा को आत्म-बल के सिद्धांत का समर्थन प्राप्त है जिसमे अंतत: प्रतिद्वंदी पर जीत की आशा में कष्ट सहा जाता है . लेकिन तब क्या हो जब ये प्रयास अपना लक्ष्य प्राप्त करने में असफल हो जाएं ? तभी हमें आत्म -बल को शारीरिक बल से जोड़ने की ज़रुरत पड़ती है ताकि...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) Jaya Singh10-05-2018संघ-भाजपा द्वारा जारी ‘देशभक्ति’ के शोर के बीच हमें खुद से यह सवाल करना चाहिए कि देश क्या है? और देशभक्ति किसे कहते हैं? देश क...
शिवम् मिश्रा
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आज ८ अप्रैल है ... आज का दिन समर्पित है क्रांति को ... जहाँ एक ओर सन १८५७ के प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पांडे जी की १६१ वीं पुण्यतिथि है वही दूसरी ओर सन १९२९ के सेंट्रल असेम्बली बम कांड की ८९ वीं वर्षगांठ है |आइये इन के बारे में...