ब्लॉगसेतु

Pratibha Kushwaha
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देश की गुलामी के दौर में शिक्षा कुछ जातीय वर्गों और जेंडर स्तर पर पुरुषों तक ही सीमित थी। ऐसे में जागरुकता और समाज सुधार की दृष्टि से सभी में शिक्षा के प्रसार की आवश्यकता महसूस हुई। इसलिए इस दौर में स्त्री शिक्षा की जरूरत को भी अत्यधिक बल दिया गया। यह सर्वसिद्ध तथ्...
PRAVEEN GUPTA
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भारतेंदु हरिश्चंद्र: आधुनिक हिंदी के पितामह जिनकी जिंदगी लंबी नहीं बड़ी थी भारतेंदु हरिश्चंद्र को केवल 35 वर्ष की आयु मिली, लेकिन इतने ही समय में उन्होंने गद्य से लेकर कविता, नाटक और पत्रकारिता तक हिंदी का पूरा स्वरूप बदलकर रख दिया। हिन्दी साहित्य के माध्यम से नवजा...
मुन्ना के पाण्डेय
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[यह लेख दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित कॉलेज मिरांडा हाउस के हिंदी-विभाग की एसोसिएट प्रोफ़ेसर डॉ. रमा यादव ने लिखा है. यह लेख प्रो. रमेश गौतम की पुस्तक 'नाटककार भारतेंदु : नए सन्दर्भ नए विमर्श'(अनन्य प्रकाशन, दिल्ली  में संकलित है. डॉ. रमा न केवल एक बेहतरीन...
विजय राजबली माथुर
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***Sudhakar Adeeb18 agust 2015  · 20वीं शताब्दी के एक महान साहित्यकार अमृतलाल नागर जी (सन् 1916-1990) ने 19वीं शाताब्दी के अपने पूर्वज महान साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र जी (सन् 1850-1885) के जीवन चरित्र पर एक नाटक लिखा। नागर जी की जन्मशताब्दी समारोह में...