ब्लॉगसेतु

Vijay Prabhakar Nagarkar
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हाल के दशकों में पुरखों के ज़माने से चली आ रही सैंकड़ों भाषाएं धीरे धीरे शांत होने लगी हैं. उन्हीं के साथ विलुप्त हो गई है उन्हें बोलने वाले लोगों की संस्कृति, ज्ञान और परंपराएं. जो भाषाएं बच गईं हैं उन्हें संरक्षित रखने और नए प्राण फूंकने...
Sanjay  Grover
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क्या ईश्वर क़िताबें लिखता है!? हम सब कभी न कभी ऐसे दावों से दो-चार होते रहे हैं। कमाल की बात यह है कि कथित ईश्वर की लिखी और आदमी की लिखी क़िताबों में ज़रा-सा भी अंतर नहीं दिखाई देता। वही पीला क़ाग़ज़, वही काली स्याही ! ईश्वर को लिखनी ही थीं तो ज़रा अलग़ तरह से लिखता कि ग़री...
विजय राजबली माथुर
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स्पष्ट रूप से पढ़ने के लिए इमेज पर डबल क्लिक करें (आप उसके बाद भी एक बार और क्लिक द्वारा ज़ूम करके पढ़ सकते हैं ) संकलन-विजय माथुर, फौर्मैटिंग-यशवन्त यश
सतीश सक्सेना
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इस हिन्दुस्तान में रहते,अलग पहचान सा लिखना !कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना ! दिखें यदि घाव धरती के,वहां ऋणदान सा लिखना घरों में बंद,मां बहनों पे,कुछ आसान सा लिखना !विदूषक हैं , यहाँ धर्माधिकारी ,उनके शिष्यों के , इन हिंदी पुरस्कारों के लिए,अपमान सा...
sanjiv verma salil
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भाषा विविधा:  चार्ल्स बुवोस्की की एक कविता हिंदी अनुवाद सहित So You Want To Be A Writer...तो तुम एक लेखक बनना चाहते हो charles bukowskiचार्ल्स बुवोस्की*if it doesn't come bursting out of you in spite of everything,don't do it.सब कुछ के बाद भी अग...
E & E Group
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 हिंदी दिवस हर वर्ष 14 सितम्बर को मनाया जाता है। हिंदी दिवस पर सरकारी, गैर सरकारी कार्यालयों में विशेष कार्यक्रम का आयोजन होता है। हिंदी दिवस की मान्यता के बारे में काफी कम लोगों को जानकारी है। केंद्रीय हिंदी संस्थान के हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. गंगाधर बोगड...
अरुण कुमार निगम
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"हिन्दी भाषा भारत के लिए परम हितकारी है"(जनकवि कोदूराम "दलित" जी की ताटंक छन्द आधारित हिन्दी कविता)सरल सुबोध सरस अति सुंदर, लगती प्यारी-प्यारी हैदेवनागरी लिपि जिसकी सारी लिपियों से न्यारी हैऋषि-प्रणीत संस्कृत भाषा जिस भाषा की महतारी हैवह हिन्दी भाषा भारत के लिए परम...
sanjiv verma salil
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मगही भाषा: इतिहास और विकास ‘‘तैत्तिरीय संहिता’’ के निम्न श्लोक से भाषा का स्वरूप स्पष्ट हो जाता है - वाग्वै पराच्यव्याकृतवदत। ते इन्द्रमब्रुवमन इमा नो वाच।। व्याकुर्वति . . . तामिद्रो मध्यतोऽवक्रम्य व्याकरोत।।  ६/४/७ अर्थात पुरा-काल में वाणी अव्याकृत (व्याक...
ज्योति  देहलीवाल
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हिंदी हमारी राजभाषा हैं। आज भी कई लोग हिंदी को ही राष्ट्रभाषा समझते हैं! लेकिन हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा नहीं, राजभाषा हैं!! भारत की कोई राष्ट्रभाषा नहीं हैं। क्योंकि भारत में कई प्राचीन भाषाएं हैं जो पूरी तरह विकसित हैं और बड़े जनसमूह द्वारा बोली जाती हैं। भारत में स...
sanjiv verma salil
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संस्कृत दोहा: शास्त्री नित्य गोपाल कटारेवृक्ष-कर्तनं करिष्यति, भूत्वांधस्तु भवान्। / पदे स्वकीये कुठारं, रक्षकस्तु भगवान्।। मैथली दोहा: ब्रम्हदेव शास्त्रीकी हो रहल समाज में?, की करैत समुदाय? / किछु न करैत समाज अछि, अपनहिं सैं भरिपाय।।अवधी द...