विश्व कविता दिवस परप्रस्तुत है आज एक बाल कवितासड़क  किनारे जो भी पाया,पेट उसी से यह भरती है।मोहनभोग समझकर,भूखी गइया कचरा चरती है।।  कैसे खाऊँ मैं कचरे को,बछड़ा मइया से कहता है।दूध सभी दुह लेता मालिक,उदर मेरा भूखा रहता है।। भोजन की आशा में ब...