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Bhavna  Pathak
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धर्म, मज़हब, रिलिजन या आगे चलकर इसके लिए कोई और नया शब्द आ जाय पर मतलब तो सभी का एक ही है ऐसा कोई रास्ता जिस पर चल कर मानब समाज खुशहाल हो, दुखों से छुटकारा मिले। दुनिया भर के सारे धर्मों की मंजिल यही खुशहाली ही तो है। कोई इसे मोक्ष के रूप में देखता है तो कोई स्वर्ग...
केवल राम
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गत अंक से आगे....मैं जहाँ तक समझ पाया हूँ कि दुनिया को बदलने का प्रयास करने से पहले हम खुद को बदलने का प्रयास करें. जब एक-एक करके हर कोई खुद को मानवीय भावनाओं के अनुरूप ढालने का प्रयास करेगा तो दुनिया का स्वरुप स्वतः ही बदल जायेगा. लेकिन आज तक जितने भी प्रयास हुए ह...