ब्लॉगसेतु

kumarendra singh sengar
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आजकल लोगों की समझ में नहीं आ रहा है कि क्या किया जाये और क्या न किया जाये? यह स्थिति किसी आम आदमी की अकेले नहीं है, यह समस्या हर वर्ग के साथ है। जो सम्पन्न हैं उनके साथ समस्या है कि अपनी सम्पन्नता को और कैसे बढ़ाया जाये। कैसे अपनी सम्पन्नता और वैभव के दम पर चारों ओर...
सतीश सक्सेना
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घर घर से आवाज कन्हैया जीतेगा !कौओं में परवाज़ ,कन्हैया जीतेगा !बुलेट ट्रेन,स्मार्ट सिटी के झांसों में फंदे काट तमाम,कन्हैया जीतेगा !नहले दहले, अंतिम  ठठ्ठा मार रहेमक्कारों पर गाज़,कन्हैया जीतेगा !भारत मां घायल है ,इन गद्दारों  से , जनमन लेके साथ,क...
महेश कुमार वर्मा
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7 वर्षीय बच्ची की संदेहास्पद मौत पर पुलिस की संदेहास्पद भूमिकाकल होली के दिन 21 मार्च 2019 को पटना के मैनपुरा में LCT घाट व रामजानकी मंदिर के बीच कनुआन गली में एक 7 वर्षीय बच्ची की संदेहास्पद मौत हो गई।  इस संदेहास्पद मौत से कई सवाल उठ रहे हैं। घटनास्थल पर पु...
सतीश सक्सेना
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वह दिन भूलीं कृशकाय बदन,अतृप्त भूख से , व्याकुल हो,  आयीं थीं , भूखी, प्यासी सी इक दिन इस द्वारे आकुल हो जिस दिन से तेरे पाँव पड़े  दुर्भाग्य युक्त इस आँगन में !अभिशप्त ह्रदय जाने कैसे ,भावना क्रूर इतनी मन में ,पीताम्बर प...
सतीश सक्सेना
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हे प्रभु ! इस देश में इतने निरक्षर, ढोर क्यों ?जाहिलों को मुग्ध करने को निरंतर शोर क्यों !अनपढ़ गंवारू जान वे मजमा लगाने आ गए ये धूर्त मेरे देश में , इतने बड़े शहज़ोर क्यों ?साधु संतों के मुखौटे पहन कर , व्यापार में   रख स्वदेशी नाम,सन्यासी मु...
सतीश सक्सेना
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खांसते दम ,फूलता है जैसे लगती जान जाए अस्थमा झकझोरता है, रात भर हम सो न पाएधुआं पहले खूब था अब  यह धुआं गन्दी हवा में समय से पहले ही मारें,चला दम घोटू पटाखे ,राम के आने पे कितने दीप आँखों में जले,अब लिखते आँखें जल रही हैं ,जा...
kumarendra singh sengar
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भ्रष्टाचार भरे समाज में सभी लोग परेशान हैं कि देश में भ्रष्टाचार नहीं रुक रहा है. इसको रोकने के उपाय खोजे जा रहे हैं पर सबके सब नाकाम से दिखाई दे रहे हैं. नाकामी इसलिए भी है क्योंकि भ्रष्टाचार को लेकर, भ्रष्टाचार करने वालों को लेकर सवाल उठता है कि किसे भ्रष्ट कहेंग...
सुनील  सजल
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व्यंग्य-भ्रष्टाचार मिटाने का सरकारी तरीका
दिनेशराय द्विवेदी
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दुर्घटना में बाबूलाल के पैर की हड्डी टूट गई और वह तीन महीने से दुकान नहीं आ रहा है। पूरे दिन दुकान छोटे भाई जीतू को ही देखनी पड़ती है। आज सुबह करीब 11:45 बजे मैं उसकी दुकान पर पहुंचा तो वह दुकान शुरू ही कर रहा था। जीतूमैंने उससे पूछा - तुम दुकान आने में काफी ल...
kumarendra singh sengar
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कई वर्ष हो गए थे जंगलों की, बीहड़ों की धूल फांकते हुए. ग्रामीण अंचलों में जीवन गुजारते हुए. सीधा-साधा सा जीवन, साधारण से शौक, सामान्य सा रहन-सहन. न कभी कोई तड़क-भड़क पसंद की, न कभी अपनाई. अध्यापन कार्य से जुड़े थे तो पूरी ईमानदारी, मर्यादा से अपने दायित्वों का, कार्य क...